दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए अनुमति नही दिए जाने का मामला अब देश के सबसे बड़ी अदालत पहुंच गया है. यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील नरेंद्र मिश्रा ने अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है. दायर याचिका में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस)की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लगाए जाने, बैरिकेडिंग और पुलिस बल की तैनाती का मुद्दा उठाया गया है.
दायर याचिका में इन कार्रवाई की संवैधानिक वैधता की न्यायिक जांच और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए समान संवैधानिक सुरक्षा व्यवस्था बनाने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता नरेंद्र मिश्रा ने दायर याचिका में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए है. उन्होंने 10 महीने की अवधि में 14 मौकों पर मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का कथित बदलाव और लगभग 16 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए हैं.
याचिकाकर्ता के मुताबिक मीडिया रिपोर्टों में जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शनों के लिए अनुमति नहीं दिए जाने तथा बीएनएसएस की धारा 163 के तहत सार्वजनिक सभा और आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए जाने की बात सामने आई थी. दायर याचिका में कहा गया है कि ऐसे प्रतिबंधों के लिए वैधानिक आधार के साथ-साथ आवश्यकता, तर्कसंगतता और आनुपतिकता की कसौटी पूरी होना जरूरी है.
याचिका में जंतर-मंतर और आसपास भारी पुलिस एवं सुरक्षा बल की तैनाती, बैरिकेडिंग तथा कई क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था का उल्लेख किया गया है. साथ ही आसपास के कुछ मेट्रों स्टेशनों के प्रवेश-निकास द्वार अस्थायी रूप से बंद किए जाने की मीडिया रिपोर्ट का हवाला दिया गया है. याचिकाकर्ता ने इन घटनाओं की वास्तविक स्थिति, अवधि और कानूनी आधार की संबंधित अधिकारियों से पुष्टि कराने की मांग की गई है.
अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा के अधिकारों की सुरक्षा की मांग
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 19 (1)(b) के तहत शांतिपूर्ण एवं बिना हथियार सभा करने का उल्लेख किया गया है. साथ ही कहा गया है कि इन अधिकारों पर लगाए जाने वाले प्रतिबंध संविधान के अनुरूप और उचित होने चाहिए. याचिका में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकरियों की हिरासत, लाठीचार्य, आंसू गैस, वाटर कैनन या अन्य बल प्रयोग की स्थिति में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की गई है.
इसके अलावे सीसीटीवी और पुलिस रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की गई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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