दिल्ली में संपत्तियों के फ्रीहोल्ड कन्वर्जन में देरी पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी.
Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने काठपुतली कॉलोनी के करीब 2800 परिवारों के पुनर्वास से जुड़ी याचिका पर डीडीए, केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय, दिल्ली सरकार और रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. यह याचिका काठपुतली रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से दायर की गई है.
डीडीए ने आपत्ति जताई
मामले की सुनवाई के दौरान याचिककर्ताओ की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि काठपुतली कॉलोनी के पात्र परिवारों को वर्ष 2014 से आनंद पर्वत स्थित ट्रांजिट कैंप में रहना पड़ रहा है. उनका कहना है कि काठपुतली कॉलोनी में उनके लिए बनाए गए फ्लैट तैयार होने के बावजूद परिवारों को वहां शिफ्ट नहीं किया गया है. हालांकि मामले की सुनवाई के दौरान डीडीए ने फ्लैटों के पूरी तरह तैयार होने के दावे पर आपत्ति जताई है. डीडीए की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि इस संबंध में फिलहाल उनके पास आवश्यक निर्देश नहीं मिला है. इसके बाद हाई कोर्ट ने डीडीए को यह सत्यापित करने का निर्देश दिया है, कि काठपुतली कॉलोनी में फ्लैट वास्तव में तैयार हो चुके हैं या नहीं.
विवाद का असर लोगों पर नहीं पड़नी चाहिए
कोर्ट ने कहा कि यदि फ्लैट तैयार पाए जाते हैं, तो पात्र आवंटियों को वहां शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाए. याचिककर्ताओ की ओर से पेश वकील ने कहा कि जब पुनर्वास के लिए बनाए गए फ्लैट तैयार हैं, तो फिर पात्र परिवारों को उनमें स्थानांतरित करने में देरी क्यों हो रही है. एसोसिएशन का कहना है कि करीब 2800 परिवार लंबे समय से स्थायी पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं और ट्रांजिट कैंप में रहने के कारण उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
कोर्ट ने डीडीए से आनंद पर्वत स्थित ट्रांजिट कैंप में रहने वाले परिवारों को बिजली, पानी और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधा मुहैया कराने का निर्दर्श दिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि डीडीए और डेवलपर के बीच चल रहे आपसी विवाद का असर कैंप में रहने वाले लोगों की मूलभूत सुविधाओं पर नहीं पड़नी चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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