राऊज एवेन्यु कोर्ट आईआरसीटीसी घोटाला से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव सहित अन्य के खिलाफ 30 अक्टूबर को औपचारिक तौर पर आरोप तय करेगा. 10 सितंबर को कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, सरला गुप्ता, लारा प्रोजेक्ट्स और सुजाता होटल्स सहित 9 लोगों के खिलाफ आरोप तय किया था. जबकि 7 लोगों को बरी कर दिया था.
कोर्ट ने जिन लोगो को बरी किया था उनमें गौरव गुप्ता, नथमल ककरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, राजीव कुमार रेलन और अभिषेक फाइनेंस को आरोपो से डिस्चार्ज कर दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि जिस न्यायाधीश ने आरोप तय किया था, उनका हस्ताक्षर नही है और उनको हाई कोर्ट का रजिस्ट्रार बना दिया गया है. जिसपर अब इस कानूनी पहलू पर राय मशविरा के बाद अदालत औपचारिक तौर पर आरोप तय करेगा.
यह मामला आईआरसीटीसी के दो होटलों के रखरखाव और संचालन का ठेका एक निजी कंपनी को दिए जाने से जुड़ा है. आरोप है कि इस प्रक्रिया में कथित तौर पर अनियमितताएं हुई और उसके बदले में जमीन का लेन-देन किया गया. कोर्ट ने माना था ऐसा नहीं लगता है कि लालू प्रसाद यादव के खिलाफ जांच राजनीति से प्रभावित थी.
कोर्ट ने कहा था लारा प्रोजेक्ट को जिस तरह फायदा पहुचा वह लालू प्रसाद यादव की भूमिका पर संदेह पैदा करता है. कोर्ट ने कहा था कि प्रथम दृष्टया इस बात का मजबूत संदेह मौजूद है कि अपराध से अर्जित आय परिवार के सदस्यों के नाम पर पैदा की गई और उसका लाभ उठाया जा रहा है. अदालत ने लारा प्रोजेक्ट को कथित तौर पर मिले लाभ के तरीके पर भी सवाल उठाए.
रेल मंत्री के कार्यकाल में टेंडर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी
कोर्ट ने कहा था कि लारा प्रोजेक्ट को जिस तरह का फायदा पहुचाया गया, उससे लालू प्रसाद यादव की भूमिका को लेकर संदेह पैदा होता है. कोर्ट के फैसले के मुताबिक लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते उनके नेतृत्व में रेलवे अधिकारियों ने टेंडर प्रक्रिया में कथित तौर पर हेरफेर किया. ईडी ने लालू प्रसाद यादव परिवार के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी.
दाखिल चार्जशीट में लालू यादव के अलावा उनकी पत्नी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती और हेमा यादव को मुख्य रूप से नामजद आरोपी बनाया था. इनके अलावा कुछ अन्य लोगों और कंपनियों के खिलाफ भी ईडी ने चार्जशीट दायर किया है.
अदालत ने पहले की सुनवाई में यह भी माना था कि कथित टेंडर घोटाले की साजिश लालू प्रसाद यादव की जानकारी में रची गई थी. बता दें कि IRCTC का मामला लैंड फॉर जॉब मामले से अलग है. IRCTC घोटाला भी 2004 में लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते हुआ था. दरअसल रेलवे बोर्ड ने उस वक्त रेलवे की कैटरिंग और रेलवे होटलों की सेवा को पूरी तरह IRCTC को सौप दिया था.
2017 में ईडी ने दाखिल की थी चार्जशीट
इस दौरान रांची और पूरी के बीएनआर होटल के रखरखाव, संचालन और विकास को लेकर जारी टेंडर में अनियमितताएं किए जाने की बात सामने आई थी. इस मामले में ईडी ने 2017 में चार्जशीट दाखिल किया था. जिसमें लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मेसर्स लारा प्रोजेक्ट एलएलपी, सरला गुप्ता, प्रेमचंद गुप्ता, गौरव गुप्ता, नाथ मल ककरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, मेसर्स सुजाता होटल, विनय कोचर, विजय कोचर, राजीव कुमार रेलान और मेसर्स अभिषेक फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड शामिल है.
वही सीबीआई की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही है. सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव सहित 13 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया है. वर्ष 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री रहे, उस समय रेलवे बोर्ड ने विभाग के सभी होटलों और ट्रेनों में केटरिंग सेवा IRCTC को सौप दिया था. इसी दौरान झारखंड के रांची और ओडिसा के पूरी में स्थित होटलों के टेंडर में गड़बड़ी की बात सामने आई थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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