प्रधानमंत्री आवास की ओर किसी भी प्रस्तावित मार्च को पूरी तरह रोकने और हाई-सिक्योरिटी (उच्च सुरक्षा) इलाके में राजनीतिक प्रदर्शनों के लिए स्पष्ट नियम व मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने की मांग को लेकर देश भर के सैकड़ों वकीलों ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है. इसके साथ ही, वकीलों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को एक संयुक्त पत्र लिखकर इस अति-संवेदनशील मामले में स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेने और उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्रों में बिना अनुमति होने वाले प्रदर्शनों पर रोक लगाने के लिए व्यापक राष्ट्रीय दिशानिर्देश जारी करने की मांग की है. यह संयुक्त ज्ञापन और पत्र सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील साकेत गुप्ता के माध्यम से भेजा गया है.
बिना अनुमति प्रदर्शन की न मिले इजाजत’
वकीलों ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा कि प्रधानमंत्री आवास देश के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उच्च सुरक्षा वाले प्रतिष्ठानों में से एक है. ऐसे वीवीआईपी (VVIP) क्षेत्रों में बिना पूर्व अनुमति के राजनीतिक विरोध-प्रदर्शन या घेराव की अनुमति किसी भी स्थिति में नहीं दी जानी चाहिए. उन्होंने दिल्ली पुलिस से त्वरित मांग की कि पीएम आवास और आसपास के हाई-सिक्योरिटी जोन में राजनीतिक प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए एक सख्त एसओपी (Standard Operating Procedure) तैयार की जाए.
21 जुलाई के घटनाक्रम का उल्लेख
वकीलों ने 21 जुलाई 2026 को हुए घटनाक्रम का हवाला देते हुए बताया कि उस दिन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा, सपा प्रमुख अखिलेश यादव सहित कई प्रमुख विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के बड़ा प्रदर्शन किया था.
वकीलों का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान मौके पर तैनात पुलिस अधिकारियों ने नेताओं से कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए वहां से हटने की बार-बार अपील की थी, लेकिन इसके बावजूद प्रदर्शन कई घंटों तक चलता रहा. ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने खुद मौके पर जाकर राहुल गांधी से मुलाकात की थी और प्रदर्शन खत्म करने का अनुरोध करते हुए संसद के भीतर इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा कराने का भरोसा दिया था.
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वकीलों ने राहुल गांधी के उस सोशल मीडिया पोस्ट का भी विशेष रूप से जिक्र किया, जिसमें उन्होंने आम जनता और कार्यकर्ताओं से इस प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी. वकीलों का तर्क है कि प्रधानमंत्री आवास जैसे अति-सुरक्षित इलाके में भारी भीड़ जुटाने से सुरक्षात्मक दृष्टि से गंभीर मुश्किलें पैदा हो सकती हैं.
मार्च के एलान के बाद बढ़ी हलचल
वकीलों की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब E-20 पेट्रोल के मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी प्रधानमंत्री आवास की ओर विरोध मार्च निकालने का एलान किया है. तय कार्यक्रम के अनुसार, अरविंद केजरीवाल अपने लोधी एस्टेट स्थित सरकारी आवास से आप (AAP) के केंद्रीय कार्यालय के लिए रवाना हुए, जहां से वे पार्टी के भारी कार्यकर्ताओं के साथ पीएम आवास की ओर मार्च करने वाले हैं. इसी तरह के प्रस्तावित प्रदर्शनों से उत्पन्न होने वाली सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए वकीलों ने पुलिस और न्यायपालिका से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है.
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