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मल्लिकार्जुन खड़गे की मुश्किलें कम होंगी या बढ़ेंगी? RSS पर टिप्पणी को लेकर कोर्ट में जवाब दाखिल, अब 15 अप्रैल को अगली सुनवाई

Mallikarjun Kharge RSS Statement Case: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 2023 कर्नाटक चुनाव के दौरान RSS और BJP पर की गई टिप्पणी के मामले में कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है. खड़गे ने राउज एवेन्यू कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाए हैं. मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी.

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Mallikarjun Kharge RSS Statement Case: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा 2023 कर्नाटक विधानसभा के दौरान बीजेपी और आरएसएस को लेकर की गई टिप्पणी पर अपना जवाब दाखिल कर दिया है. खड़गे ने अपना जवाब दाखिल कर उनपर लगे सभी आरोपों का खंडन किया है. खड़गे ने तीस हजारी कोर्ट के मजिस्ट्रेट द्वारा जारी आदेश को चुनौती देने वाली पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करने के कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाए है. खड़गे के वकील ने कहा कि विशेष अदालत के पास पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करने का अधिकार नही है.

खड़गे ने यह भी कहा कि पुनरीक्षण के लिए अधिकार क्षेत्र तीस हजारी कोर्ट, नई दिल्ली के प्रधान एवं सत्र न्यायाधीश का है, न कि राऊज एवेन्यु कोर्ट के पास. राऊज एवेन्यु कोर्ट के स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने 15 अप्रैल को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि खड़के का जवाब आज ही मिला है, लिहाजा जवाबी जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया जाए, जिसके बाद कोर्ट ने 15 अप्रैल की तारीख तय की है.

तीस हजारी कोर्ट से खारिज हो चुकी है शिकायत

मामले में तीस हजारी कोर्ट के मजिस्ट्रेट कोर्ट ने खड़गे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को खारिज कर दिया था. जिसके बाद शिकायतकर्ता ने सेशन कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. दायर याचिका में 11 नवंबर 2025 को तीस हजारी कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को रद्द करने की मांग की गई है. तीस हजारी कोर्ट ने खड़गे के खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत को खारिज कर दिया था.

कोर्ट ने याचिकाकर्ता की उस मांग को भी खारिज कर दिया था, जिसमें संज्ञान लेने की मांग की गई थी. यह शिकायत आरएसएस के सदस्य की ओर से दायर की गई थी. जिसमें आरोप लगाया गया था कि खड़गे ने अप्रैल 2023 में कर्नाटक के नरेगल में एक चुनावी रैली के दौरान कथित तौर पर नफरत फैलाने वाला भाषण दिया था, और पीएम मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी.

‘हिंसा भड़काने का मामला नहीं बनता’

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि खड़गे द्वारा दिया गया बयान कोर्ट की नजर में किसी समुदाय या धर्म को निशाना बनाकर नही दिया गया था, बल्कि यह राजनीतिक और सैद्धांतिक विचार का हिस्सा था. कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि इस मामले में हिंसा भड़काने का मामला नही बनता है.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में धारा 156 (3) सीआरपीसी के तहत जांच की कोई जरूरत नही है. कोर्ट ने कहा था कि शिकायतकर्ता को समन-पूर्व जारी साक्ष्य पेश करने की स्वतंत्रता है. कोर्ट ने शिकायतकर्ता से कहा था कि बाद में अगर उन्हें लगता है कि किसी विवादित तथ्यों से संबंधित जांच की जरूरत होती है तो धारा 202 सीआरपीसी के प्रावधान का सहारा लिया जा सकता है.

दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में अपना रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा था कि विवादित बयान देने की घटना कर्नाटक का है, इसलिए दिल्ली में इसको लेकर कोई मामला नहीं बनता है. क्योंकि यह क्षेत्राधिकार से बाहर है. वही शिकायतकर्ता के वकील ने कहा था कि यह भड़काऊ बयान देने का मामला है और यह सोशल मीडिया और कई माध्यमों से पूरे देश मे फैल गया है. इसलिए इसको लेकर कही भी प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है.

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क्या था पूरा मामला?

बतादें कि वकील रविंद्र गुप्ता ने मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ आईपीसी की धारा 153 ए, 153 बी, 295 ए, 120बी और 34 के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी. 27 अप्रैल 2023 को कर्नाटक के एक जनसभा में प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ विवादित बयान दिया था. फिर दूसरे दिन के जनसभा में उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए खड़गे ने कहा था कि उन्होंने जहरीला वाला बयान भाजपा व आरएसएस को लेकर दिया था. शिकायतकर्ता ने कहा था कि वह वर्षो से आरएसएस के जुड़ा रहा है और खड़गे के बयान से उन्हें काफी चोट पहुची है.



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