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बंगाल में जजों के साथ बदसलूकी पर भड़के CJI सूर्यकांत, आधी रात सुप्रीम कोर्ट को लिखना पड़ा आदेश; ममता सरकार में मचा हड़कंप!

पश्चिम बंगाल के मालदा में जजों को बंधक बनाने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया. CJI सूर्यकांत ने इसे राज्य मशीनरी की विफलता बताते हुए स्वतंत्र जांच और सुरक्षा के सख्त निर्देश दिए…

Edited by Rohit Agrawal

पश्चिम बंगाल के मालदा में न्यायिक अधिकारियों को 12 घंटे तक बंधक बनाए जाने की रूह कंपा देने वाली घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार किया है. मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसे राज्य मशीनरी की ‘पूर्ण विफलता’ करार देते हुए ममता सरकार और चुनाव आयोग को जमकर फटकार लगाई.

आधी रात को आदेश लिखवाने की नौबत आने पर दुख जताते हुए कोर्ट ने साफ कहा कि यह कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश लगती है. कोर्ट ने अब इस पूरे मामले की कमान अपने हाथ में ले ली है और स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने का ऐलान कर दिया है.

जानिए क्या था पूरा मामला?

मालदा में वोटर लिस्ट विवाद को लेकर भड़की हिंसा उस वक्त बेहद गंभीर हो गई जब उपद्रवियों ने 7 न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया. चौंकाने वाली बात यह है कि बंधक बनाए गए अधिकारियों में तीन महिला जज भी शामिल थीं, जिन्हें करीब 12 घंटे तक दहशत के साये में रहना पड़ा.

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि दस्तावेज जमा करने के बावजूद उनके नाम मतदाता सूची में नहीं जोड़े गए. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जजों का घेराव करना न्यायपालिका पर सीधा हमला है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

ममता सरकार को लगाई CJI ने कड़ी फटकार

सुनवाई के दौरान जब पश्चिम बंगाल सरकार के वकील ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि जिन अधिकारियों की लापरवाही की बात हो रही है, उन्हें चुनाव आयोग ने ट्रांसफर किया था, तो CJI सूर्यकांत का पारा चढ़ गया. उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि आप हमें मजबूर कर रहे हैं. ये अधिकारी कहीं बाहर से नहीं आए हैं बल्कि ये बंगाल के ही हैं और इन्हें इस कोर्ट को जवाब देना होगा. कोर्ट ने अधिकारियों के आचरण को ‘निंदनीय’ बताते हुए मुख्य सचिव, DGP और मुख्य निर्वाचन अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर 6 अप्रैल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का आदेश दिया है.

मालदा वाले बवाल पर अदालत में और क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को तुरंत आदेश दिया है कि सभी न्यायिक अधिकारियों और उनके परिवारों को केंद्रीय सुरक्षा बलों (Central Forces) का सुरक्षा घेरा प्रदान किया जाए. कोर्ट ने साफ निर्देश दिया है कि सुनवाई या आपत्तियों के दौरान किसी भी हाल में भीड़ इकट्ठा न होने दी जाए.

सुप्रीम आदेश के मुताबिक, एक समय में 2-3 से ज्यादा लोगों को प्रवेश न मिले और परिसर के बाहर 5 से अधिक लोगों के जमा होने पर पाबंदी रहे. CJI ने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी जज को थोड़ा भी खतरा महसूस होता है, तो सुरक्षा की तुरंत समीक्षा की जाए.

सुप्रीम कोर्ट खुद करेगा जांच की मॉनिटरिंग

कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे ‘स्टेट मशीनरी का फेलियर’ माना है. CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने फैसला सुनाया है कि इस घटना की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाएगी और इसकी निगरानी (Monitoring) खुद सुप्रीम कोर्ट करेगा.

साथ ही कोर्ट ने राज्य प्रशासन से पूछा है कि कोलकाता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पत्र के बावजूद अब तक दोषियों पर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की गई? इस मामले की अगली सुनवाई अब 6 अप्रैल को होगी, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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