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Meerut Fake Stamp Scam: 997 बैनामों में लगे थे 1577 फर्जी स्टांप, पुलिस ने कुर्क की आरोपी की संपत्ति; EOW भी कर रही जांच

मेरठ में 11 करोड़ रुपये से अधिक के बहुचर्चित फर्जी स्टांप घोटाले में पुलिस ने मंगलवार को कड़ा एक्शन लेते हुए आरोपी स्टांप वेंडर अक्षय गुप्ता की संपत्तियों को कुर्क कर लिया है. रजिस्ट्री कार्यालय की जांच में 997 बैनामों में 1,577 फर्जी स्टांप के इस्तेमाल का पर्दाफाश हुआ था. पुलिस अब मामले के अन्य नामजद आरोपियों और प्रॉपर्टी डीलरों की संपत्तियों का ब्योरा तैयार कर रही है.

Meerut Fake Stamp Scam
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

MEERUT STAMP SCAM CRACKDOWN: मेरठ में करोड़ों रुपये के चर्चित फर्जी स्टांप घोटाले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. घोटाले के आरोपी स्टांप विक्रेता अक्षय गुप्ता से जुड़ी संपत्तियों पर कार्रवाई की गई है. इस प्रकरण में अन्य आरोपियों की संपत्तियों और उनकी भूमिका की भी जांच जारी है.

यह वही मामला है, जिसमें फर्जी स्टांप के जरिए बड़ी संख्या में बैनामे कराए जाने का खुलासा हुआ था. जांच में 997 बैनामों में 1,577 फर्जी स्टांप इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई थी. पुलिस की रिपोर्टों में घोटाले की रकम 11 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है. अक्षय गुप्ता स्टांप विक्रेता था और घोटाले के मुख्य आरोपी विशाल वर्मा से उसके संबंधों की जांच हुई थी. पुलिस ने 12 जनवरी 2025 को अक्षय गुप्ता को गिरफ्तार किया था. उस समय पुलिस ने उससे पूछताछ के आधार पर घोटाले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की थी. जांच के दौरान विशाल वर्मा और अक्षय गुप्ता के बीच पैसों के लेनदेन से जुड़ी बातचीत का ऑडियो भी सामने आया था, जिसे जांच में शामिल किए जाने की बात पुलिस अधिकारियों ने कही थी.

997 बैनामों में फर्जी स्टांप पाए गए

मामले का खुलासा रजिस्ट्री कार्यालय की जांच के दौरान हुआ था. शुरुआती जांच में 997 बैनामों में फर्जी स्टांप पाए गए थे. बाद की जांच में फर्जी स्टांप की संख्या 1,577 और घोटाले की रकम 11 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई. इस मामले में सिविल लाइन थाने में मुकदमे दर्ज किए गए थे. जांच में कई प्रॉपर्टी डीलरों और अन्य लोगों के नाम भी सामने आए थे. जनवरी 2025 में इस मामले में सातवां मुकदमा भी दर्ज किया गया था, जिसमें विशाल वर्मा के साथ दो प्रॉपर्टी डीलरों को नामजद किया गया था.
दिसंबर 2025 में अक्षय गुप्ता एक अलग मामले में फिर पुलिस की कार्रवाई के घेरे में आया.

क्‍या आरोप था

आरोप था कि जेल से जमानत पर रिहाई के लिए फर्जी जमानतदार और कूटरचित पुलिस सत्यापन रिपोर्ट का इस्तेमाल किया गया. जांच में जिन पुलिसकर्मियों के नाम से रिपोर्ट भेजी गई थी, उनकी संबंधित थानों में तैनाती नहीं मिली. इसके बाद सिविल लाइन थाने में अक्षय समेत आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था. फर्जी स्टांप मामले की जांच बाद में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को भी सौंपे जाने की जानकारी सामने आई थी. वही मेरठ के एसपी सिटी विनायक गोपाल भोंसले का कहना है कि आज पुलिस ने अक्षय गुप्ता की संपत्तियां कल की इस प्रकरण में जो भी दोषी हैं उनकी संपत्तियों की डिटेल कलेक्ट की जा रही है, कोर्ट के आदेश पर अन्य आरोपियों की भी संपत्तियों कुर्क कर दी जाएगी.

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