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NEET पेपर लीक केस: एंटी-चीटिंग कानून की फास्ट ट्रैक कोर्ट में CBI की अनुपस्थिति पर जज नाराज

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में नए पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट 2024 के तहत गठित फास्ट ट्रैक कोर्ट की जज अनु ग्रोवर बालिगा ने सीबीआई वकील के न रहने पर नाराजगी जताई.

Fast Track Court

नीट-यूजी (NEET-UG) 2026 पेपर लीक मामले में नवगठित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है. अदालत ने अभियोजन निदेशक को सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वह केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का पक्ष मजबूती से रखने के लिए तुरंत एक विशेष अभियोजक (प्रॉसिक्यूटर) की नियुक्ति करे. इसके साथ ही, अदालत ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में आरोपी दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की ओर से दायर नियमित जमानत याचिकाओं पर सुनवाई को आगामी 3 अगस्त 2026 तक के लिए स्थगित कर दिया है.

CBI की गैरमौजूदगी से जज नाराज

विशेष न्यायाधीश जस्टिस अनु ग्रोवर बालिगा की अदालत केंद्र सरकार के नए ‘एंटी-चीटिंग कानून’ के तहत दर्ज सभी लंबित आपराधिक मुकदमों की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई कर रही है. सुनवाई के दौरान जब कोर्ट ने देखा कि देश की इतनी बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई की ओर से पक्ष रखने के लिए कोई भी प्रॉसिक्यूटर कोर्ट रूम में मौजूद ही नहीं है, तो जज ने इस पर गहरा असंतोष और नाराजगी व्यक्त की.

गौरतलब है कि हाल ही में लागू किए गए ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024’ के तहत मामलों के त्वरित निपटारे के लिए इस फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया है. पहली बार इस मामले को सुनवाई के लिए यहाँ सूचीबद्ध किया गया था. नीट (NEET), यूपीएससी (UPSC), एसएससी (SSC) और एनटीए (NTA) जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक रोकने के लिए बनाए गए इस नए कानून में दोषियों के लिए 5 साल तक की कठोर जेल की सजा और 10 लाख रुपए तक के भारी जुर्माने का कड़ा प्रावधान किया गया है.

सीकर कोचिंग में हुई थी जान-पहचान

मामले की जांच रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी मांगीलाल बिवाल ने अपने बेटे विकास बिवाल के लिए नीट का पेपर जुगाड़ने के उद्देश्य से शुभम खैरनार से संपर्क किया था. सीबीआई जांच के दौरान विकास के मोबाइल फोन से लीक हुआ प्रश्नपत्र भी बरामद किया गया था.

सीबीआई के पुख्ता दावों के मुताबिक, मांगीलाल ने यह लीक पेपर यश यादव नामक व्यक्ति से ₹10 लाख की मोटी रकम में खरीदा था. आरोपियों से हुई पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी विकास और यश यादव की पहली जान-पहचान राजस्थान के प्रसिद्ध कोचिंग हब ‘सीकर’ में पढ़ाई के दौरान हुई थी.

NTA पैनल के टीचर का खुलासा

इससे पहले सीबीआई ने इस सिंडिकेट से जुड़े आरोपी शिवराज मोटेगांवकर की जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए राऊज एवेन्यू कोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य पेश किए थे. सीबीआई ने खुलासा किया था कि लातूर स्थित ‘रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस’ के संचालक शिवराज मोटेगांवकर ने एनटीए (NTA) के गोपनीय पैनल में शामिल केमिस्ट्री के शिक्षक पी. वी. कुलकर्णी को पेपर लीक करने के बदले ₹5 लाख की रिश्वत दी थी.

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मोटेगांवकर ने एक सोची-समझी साजिश के तहत अपने बेटे का दाखिला कुलकर्णी की कोचिंग क्लास में कराया था, जहाँ से उसे नीट-यूजी 2026 का लीक प्रश्नपत्र प्राप्त हुआ. शिक्षक पी. वी. कुलकर्णी उस अति-गोपनीय पैनल के सदस्य थे जिसने एनटीए का मूल प्रश्नपत्र तैयार किया था.

36 तस्वीरों में मिले 132 सवाल

सीबीआई के अनुसार, मोटेगांवकर ने लीक सवालों के आधार पर खुद अपनी हैंडराइटिंग में स्पेशल नोट्स तैयार किए थे. आरोपी के जब्त मोबाइल की फॉरेंसिक जांच में 36 डिजिटल तस्वीरें मिलीं, जिनमें केमिस्ट्री के 132 हाथ से लिखे सवाल दर्ज थे. वैज्ञानिक जांच में सामने आया कि इनमें से 111 सवाल एनटीए द्वारा तैयार किए गए नीट-यूजी 2026 के मूल ‘मास्टर क्वेश्चन सेट’ से हूबहू मेल खाते हैं.

उल्लेखनीय है कि 3 मई को देश भर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर नीट-यूजी की परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसके तुरंत बाद बड़े पैमाने पर पेपर लीक की शिकायतें सामने आईं और व्यापक जांच के बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया था. अब फास्ट ट्रैक कोर्ट 3 अगस्त को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.



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