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भीमा कोरेगांव मामला: हनी बाबू को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, अब जुलाई में होगी सुनवाई

Bhima Koregaon Case: भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी प्रो. हनी बाबू को सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली. कोर्ट ने याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया, अब सुनवाई जुलाई में होगी.

Supreme Court
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी हनी बाबू की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है. जस्टिस के वी विश्वनाथन और जस्टिस एन के सिंह की पीठ ने कहा गर्मियों की छुट्टी के बाद जुलाई में याचिका पर सुनवाई संभव है.

हनी बाबू ने सुप्रीम कोर्ट से स्पष्टीकरण की मांग की है कि वे जमानत के लिए हाई कोर्ट जा सकते हैं या नही. हनी बाबू ने 2024 में दायर जमानत याचिका को यह कहते हुए वापस ले लिया था कि परिस्थितियों में बदलाव’ के कारण सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस लेना चाहते है. लिहाजा कोर्ट इसकी अनुमति दे. जिसके बाद जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस पंकज मिथल की बेंच ने हनी बाबू को याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी थी.

हनी बाबू के वकील ने कोर्ट के संकेत दिया था कि वो दोबारा हाइकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल करना चाहते है. बतादें कि बॉम्बे हाइकोर्ट ने एल्गार परिषद माओवादी लिंक मामले में आरोपी दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर हनी बाबू की याचिका को खारिज कर दिया था. हनी बाबू नवी मुंबई की तलोजा जेल में बंद हैं. एनआईए ने 31 दिसंबर 2017 को पुणे में आयोजित एलगार परिषद की बैठक में कथित रूप से भड़काने वाले भाषणों के सिलसिले में जुलाई 2020 को हनी बाबू को गिरफ्तार किया गया था. परिषद की बैठक के अगले दिन जिले में भीमा कोरेगांव युद्ध स्मारक के निकट हिंसा भड़क गई थी.



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