प्रतीकात्मक चित्र (फोटो- WHO)
जहरीले सांपों के काटने के बाद प्राथमिक उपचार को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि आप देश के सभी राज्यों को शामिल कर सकते है क्योंकि पूरे देश की समस्या है. जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एस वी एन भट्टी की पीठ ने कहा कि जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए कुछ राज्यों को छह सप्ताह का समय दे दिया है. केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि सरकार इसे रिकॉर्ड पर रखेगी.
यह याचिका शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी ने अधिवक्ता विशाल तिवारी के माध्यम से दायर की है. याचिका में कहा गया है कि देश के सरकारी अस्पतालों, सरकारी मेडिकल कॉलेजों के साथ-साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पतालों में पॉलीवेनम (एंटीवेनम) और सर्पदंश उपचार उपलब्ध कराया जाए ताकि लोगों की जान बचाई जा सके. साथ ही ग्रामीण भारत में विशेष रूप से मृत्यु दर में भारी कमी लाने के लिए सर्पदंश रोकथाम स्वास्थ्य मिशन और सर्पदंश जन जागरूकता अभियान चलाने की मांग की गई है. इसके अलावा याचिका में कहा गया है कि सरकारी जिला अस्पतालों और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मानक चिकित्सा मानदंडों के अनुसार विशेष प्रशिक्षित डॉक्टरों के साथ सर्पदंश उपचार और देखभाल इकाई की स्थापना की जाए.
याचिकाकर्ता के मुताबिक पिछले दो दशकों में सांप के काटने से दस लाख से ज़्यादा भारतीयों की मौत हुई है” यह दर्शाता है कि भारत में 2000 से 2019 तक 1.2 मिलियन सांप के काटने से मौतें हुईं (जो औसतन 58,000 प्रति वर्ष है) जिनमें से लगभग आधे पीड़ित 30-69 वर्ष की आयु के थे और एक चौथाई से ज्यादा 15 वर्ष से कम आयु के बच्चे थे. बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश (जिसमें हाल ही में परिभाषित राज्य तेलंगाना भी शामिल है), राजस्थान और गुजरात में घनी आबादी वाले कम ऊंचाई वाले कृषि क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को 2001-2014 की अवधि के दौरान 70% मौतें झेलनी पड़ीं, खास तौर पर बरसात के मौसम में जब घर और बाहर सांपों और इंसानों के बीच मुठभेड़ ज्यादा होती हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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