दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट के विशेष अदालत ने 4 करोड़ रुपए के बैंक घोटाले के मामले में पंजाब नेशनल बैंक, जोरबाग शाखा के तत्कालीन मुख्य प्रबंधक कुलविंदर कौर जोहर और सह प्रबंधक रंजीव सुनेजा को तीन-तीन साल की सजा सुनाई गई है. साथ ही कोर्ट ने दोनों पर 75000-75000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है. जबकि बैंक के पैनल के वकील एन. एस परिहार को ढाई साल की सजा और 50000 रुपए का जुर्माना लगाया है.
इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने जाली दस्तवेज़ों के आधार पर ऋण मंजूर कराया और लोन की राशि को गलत तरीके से दूसरी जगहों पर ट्रांफ़सर किया. जांच में यह भी सामने आया है कि बैंक के नियमों और प्रक्रियाओं की अनदेखी करते हुए करोड़ो रूपये का नुकसान पहुचाया है. कोर्ट ने अपने फैसले में माना है कि तीनों की मिलीभगत से इस घोटाले का अंजाम दिया गया है.
आरोपियों ने किया साजिश का खुलासा
कोर्ट ने इस मामले में मुख्य आरोपी संजीव दीक्षित को भगोड़ा घोषित किया है. जबकि राहुल शर्मा और राजीव शर्मा को सबूत के आभाव में बरी कर दिया है. सीबीआई ने इस मामले में एम/एस शंकर मेटल्स:संजय शर्मा, इंद्रा रानी तथा अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ 11 जुलाई 2013 को एफआईआर दर्ज किया था. आरोप है कि सभी आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत जाली और फर्जी संपत्ति दस्तवेज़ों के आधार पर पंजाब नेशनल बैंक, जोरबाग शाखा, नई दिल्ली से 4 करोड़ रुपए की कैश क्रेडिट सुविधा धोखाधड़ी से प्राप्त की और ऋण की राशि को स्वीकृत उद्देश्य के अलावा अन्य कार्यों में ट्रांसफर कर दिया.
जांच में पाया गया है आरोपी संजय दीक्षित ने पीएनबी के अधिकारियों के. के जोहर, रंजीव सुनेजा, पैनल वकील एन. एस. परिहार तथा अन्य आरोपियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी संपत्ति दस्तवेज़ों और फर्जी केवाईसी दस्तवेज़ों के आधार पर चार करोड़ रुपए की कैश क्रेडिट सीमा स्वीकृत कराई.
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-भारत एक्सप्रेस
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