2024 पुणे पोर्श हिट एंड रन मामलों में आरोपी अशपाक मकांदर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कोर्ट शर्तो के साथ जमानत दे दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इसी मामले में समान आरोपों का सामना कर रहे सह-आरोपियों को पहले ही राहत दी जा चुकी है. ऐसे में हम समानता के आधार पर जमानत देते है.
अशपाक मकांदर पर आरोपी ड्राइवर के खून के नमूनों से छेड़छाड़ करने की साजिश रचने का आरोप है. इससे पहले कोर्ट ने आशीष मित्तल, आदित्य सूद और बिचौलिए अमर गायकवाड़ को कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दिया था. जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि कानून को ऐसे माता-पिता तक पहुचना ही होगा. इन लोगों के पास बच्चों से बात करने तक का समय नही होता है, इसलिए वे पैसों और स्पोर्ट्स कार से सेलिब्रेशन की भरपाई करते है.
कोर्ट ने कहा था कि पहले आप नाबालिग बच्चों को शराब पीने की अनुमति देते है. फिर जश्न मनाने के लिए उन्हें स्पोर्ट्स कार दे देते हैं. माता-पिता पूरी तरह बच्चों को नियंत्रित करने में असफल रहे है. जस्टिस नागरत्ना ने कहा था कि सेलिब्रेशन का मतलब तेज रफ्तार में गाड़ी चलाकर फुटपाथ पर चल रहे गरीब लोगों को कुचलना नही होता है. उन्होंने कहा था कि यह पहली बार ऐसा नही हुआ है. कानून को अब सख्त होना पड़ेगा.
कोर्ट ने माता-पिता को बताया जिम्मेदार
कोर्ट ने कहा था कि इसके असली जिम्मेदार माता-पिता है, जो बच्चों के साथ समय नही बिताते है और एटीएम कार्ड थमा देते है. कोर्ट ने कहा था कि इस तरह की घटना के बाद जनता का आक्रोश स्वभाविक है, और उसे रोका नही जा सकता. कोर्ट ने कहा था कि हमारे पास और भी बहुत कुछ कहने को है. कोर्ट ने ब्लड सैम्पल से छेड़छाड़ के आरोपी को भी जमानत दे दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि एक अपीलकर्ता आरोपी के पिता का मित्र है, दूसरा पिछली सीट पर बैठे बच्चे का पिता है और तीसरा अपीलकर्ता अमर गायकवाड़ कथित बिचौलिया है, जिसे 3 लाख रुपए लेने का आरोप है.
100 से अधिक गवाहों के बयान के बावजूद केस लंबित
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया था कि तीनों अपीलकर्ता पिछले 18 महीने से जेल में बंद है. इसमें 100 से अधिक गवाह है. ट्रायल शुरू होने का फिलहाल कोई आसार नही है. जबकि नाबालिग चालक है उसका मामला किशोर न्याय बोर्ड में चल रहा है. मित्तल और सूद पर आरोप है कि उन्होंने कार में सवार दो नाबालिगों के खून के नमूनों को अपने खून के नमूनों से बदल दिया था. इन आरोपियों पर आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण कानून की विभिन्न धाराओं के तहत जालसाजी, साक्ष्य से छेड़छाड़ और रिश्वतखोरी का मामला दर्ज किया गया था.
हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट ने आठ आरोपियों विशाल अग्रवाल, आशीष मित्तल, आदित्य सूद, अरुण कुमार सिंह, अशफाक मकंदार, अमर गायकवाड़, डॉक्टर अजय तावड़े और डॉक्टर श्रीहारी हलनोर को जमानत देने से इनकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया था. पुणे के कल्याणी नगर में पिछले साल एक तेज रफ्तार कार ने दोपहिया वाहन को टक्कर मार दी थी, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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