राऊज एवेन्यु कोर्ट 40,000 हजार करोड़ रुपए के बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में तिहाड़ जेल में बंद रिलायंस कम्युनिकेशन लिमिटेड (आरकॉम) के पूर्व निदेशक पुनीत गर्ग की ओर से दायर अंतरिम जमानत याचिका पर 4 अप्रैल को सुनवाई करेगा. पुनीत गर्ग ने मेडिकल ग्राउंड पर जमानत की मांग की है. स्पेशल न्यायाधीश अजय गुप्ता ने दूसरा मेडिकल रिपोर्ट तलब किया है. गर्ग की ओर से पेश ने कहा कि ईलाज नही कराने पर वह कैंसर का रूप धारण कर सकता हैं. मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत दाखिल चार्जशीट में रिलायंस कम्युनिकेशन लिमिटेड (आरकॉम) के पूर्व निदेशक पुनीत गर्ग को आरोपी बनाया गया है.
ईडी ने सीबीआई की एफआईआर के आधार पर ईसीआईआर दर्ज करने के बाद 29 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था. ईडी के मुताबिक यह मामला बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं, बैंक लोन के दुरुपयोग और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है. ईडी रिमांड के दौरान पुनीत गर्ग से पूछताछ कर कथित लेन-देन, कंपनियों की भूमिका और अन्य आरोपियों की संलिप्तता की जांच करेगी.
ईडी करेगी कथित लेन-देन और अन्य आरोपियों की जांच
रिमांड अर्जी पर सुनवाई के दौरान ईडी ने कोर्ट को बताया कि रिलायंस कम्युनिकेशन (आरकॉम) के पूर्व अध्यक्ष और निदेशक गर्ग को आरकॉम और उसकी समूह संस्थाओं द्वारा कथित तौर पर 40,000 करोड़ से अधिक के बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी एक चल रही जांच के मामले में गिरफ्तार किया गया है. पुनीत गर्ग रिलायंस कम्युनिकेशन में लंबे समय तक डायरेक्टर और प्रेसिडेंट जैसे बड़े पदों पर रहे. ईडी के अनुसार गर्ग 2001 से 2025 तक कंपनी में सक्रिय रहे. इस अवधि के दौरान बैंक धोखाधड़ी से मिले पैसों को छिपाने, ठिकाने लगाने और उनकी लेयरिंग करने में अहम भूमिका निभाई है. गर्ग को इस बात की पूरी जानकारी थी कि बैंक से मिले पैसे को कहां और कैसे डायवर्ट किया जा रहा है.
ईडी ने गर्ग की पत्नी के नाम पर शेयर और म्युचुअल फंड जब्त किया
ईडी ने बताया कि कथित तौर पर धन की हेराफेरी की गई धनराशि को आरकॉम की कई विदेशी सहायक कंपनियों और अपतटीय संस्थाओं के माध्यम से मोड़ दिया गया था. ईडी ने बताया कि आरकॉम के अध्यक्ष के रूप में गर्ग 2006 से 2013 के बीच कंपनी के वैश्विक उद्यम व्यवसाय का प्रबंधन कर रहे थे. उन्होंने 2014 से 2017 तक अध्यक्ष (नियामक मामलों) के रूप में भी कार्य किया. ईडी ने को कहा था कि उसने गर्ग की पत्नी के नाम पर मौजूद शेयर और म्युचुअल फंड को जब्त कर लिया गया है.
यह गिरफ्तारी 21 अगस्त 2025 को दर्ज सीबीआई की प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई जांच के बाद हुई है, जिसमें आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), आईपीसी की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात) और आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत अपराधों के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधान भी शामिल है.
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-भारत एक्सप्रेस
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