सुप्रीम कोर्ट.
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) और उसके कंसोर्टियम साझेदारों, ब्रिटिश पेट्रोलियम एक्सप्लोरेशन (अल्फा) लिमिटेड और निको (एनईसीओ) लिमिटेड ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.
दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और आरआईएल के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर सुनवाई के बाद केंद्र सरकार के पक्ष में फैसला दिया था. हाई कोर्ट ने माना था कि आरआईएल और उसके विदेशी साझेदारों ने धोखाधड़ी करके 1.729 अरब डॉलर से ज्यादा का लाभ कमाया था.
2.81 अरब डॉलर की वसूली का नोटिस
कोर्ट ने कहा था कि उन्होने ऐसे गैस भंडार से गैस निकाले जिसका कोई अधिकार नही था. जिसके बाद केंद्र सरकार ने अपने क्षेत्र के पास स्थित गैस ब्लॉक से प्राकृतिक इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसकी साझेदार फर्म बीपी पर 2.81 अरब डॉलर की मांग का नोटिस भेजा है.
डिवीजन बेंच ने इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल के फैसले को पलट दिया. जिसमें रिलायंस और बीपी को नजदीकी ब्लॉक से निकाली गई गैस के लिए किसी भी हर्जाने की देनदारी नहीं बताई गई है. केंद्र सरकार ने 1.55 अरब डॉलर के दावे को लेकर रिलायंस, बीपी और निको रिसोर्स पर आरोप लगाया था कि उन्होने ऐसे गैस भंडारों से निकासी की, जिन पर उनका कोई अधिकार नहीं था.
पीएससी के तहत किया गया कार्य
जुलाई 2018 में एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता ट्रिब्यूनल ने सरकार के दावे को खारिज कर दिया था. इसके बाद सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था. कोर्ट ने केंद्र सरकार की अपील को स्वीकार करते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज के पक्ष में दिए गए फैसले को पलट दिया. फिलहाल रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई हैं.
ओएनजीसी का दावा था कि 2009 और 2013 के बीच रिलायंस को इस गैस रिसीव से फायदा हुआ. रिलायंस जिसके पास KG-D6 ब्लॉक का 60 फीसदी हिस्सा है, का कहना था कि उसने उत्पादन प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार काम किया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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