बृजभूषण शरण सिंह (फोटो-सोशल मीडिया)
दिल्ली की राऊज एवेन्यु कोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को यौन शोषण के आरोपों से बरी किए जाने के खिलाफ महिला पहलवानों द्वारा दायर अपील पर सुनवाई के लिए 28 अक्टूबर की तारीख तय की है. मामले की सुनवाई के दौरान बृजभूषण शरण सिंह के वकील ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए कुछ समय की मांग की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया.
मामले से जुड़े मुख्य बिंदु और याचिका के आधार
महिला पहलवानों ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सेशंस कोर्ट में अपील दायर की है, जिसमें 3 अगस्त को दिए गए फैसले में सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए बृजभूषण शरण सिंह और सह-आरोपी विनोद तोमर को बरी कर दिया गया था. पहलवानों ने सह-आरोपी और डब्ल्यूएफआई के पूर्व सचिव विनोद तोमर को बरी किए जाने के खिलाफ भी याचिका दायर की है.
याचिका में लगाए गए आरोप: अपील में कहा गया है कि मजिस्ट्रेट कोर्ट का आदेश रिकॉर्ड में मौजूद साक्ष्यों के बजाय चुनिंदा व्याख्या और पुरानी रूढ़िवादी सोच पर आधारित है. याचिकाकर्ताओं के अनुसार, फैसला देते समय स्थापित कानूनी सिद्धांतों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया और सबूतों का आकलन गलत तरीके से किया गया है.
दलीलें और मांग: महिला पहलवानों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रेबेका जॉन ने दोनों आरोपियों को सख्त सजा दिए जाने की मांग की है. वहीं, बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर की ओर से पेश वकील राजीव मोहन ने सभी आरोपों को मनगढ़ंत और बदनाम करने की नीयत से लगाया गया बताकर बरी करने के फैसले को सही ठहराया है. सुनवाई के दौरान बृजभूषण शरण सिंह और विनोद दोनों आरोपी अदालत में मौजूद थे.
चार्जशीट और आरोप
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में 15 जून 2023 को चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें छह महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न, मारपीट और पीछा करने के आरोपों का जिक्र था. इसमें चार राज्यों के कम से कम 22 गवाहों (पहलवानों, एक रेफरी, एक कोच और एक फिजियोथेरेपिस्ट सहित) के बयानों को शामिल किया गया था. पुलिस ने आईपीसी की धारा 354, 354ए, 354डी और 506(1) के तहत आरोप तय किए थे.
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कोर्ट ने 10 मई 2024 को आरोप तय करने का आदेश दिया था और 11 जुलाई 2025 को अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान दर्ज करने व मुकदमा शुरू करने का निर्देश दिया था. सभी पक्षों की लंबी जिरह के बाद मजिस्ट्रेट कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था, जिसके खिलाफ अब सेशंस कोर्ट में कानूनी लड़ाई जारी है.
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