Coal Scam: दिल्ली की राऊज एवेन्यु कोर्ट ने हिंडाल्को से जुड़े कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में चल रहे मुकदमें को बंद कर दिया है. स्पेशल जज धीरज मोर ने यह फैसला सुनाया है. कोर्ट ने हिंडाल्को के पूर्व अध्यक्ष और सीईओ एसके तमोतिया और महाप्रबंधक पीआरएस मणि को आरोप मुक्त कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी या आपराधिक साजिश का प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता है.
कोर्ट ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने में सीबीआई नाकाम रही है. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है, जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि आरोपियों ने किसी अवैध उद्देश्य से साजिश रची थी. इसलिए उन्हें आरोपित अपराधों से बरी किए जाने का अधिकार है. यह मामला ओडिशा स्थित तलबीरा कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा था.
आवंटन शर्तों के उल्लंघन का दावा
सीबीआई का आरोप था कि हिंडाल्को ने आवंटन की शर्तों का उल्लंघन करते हुए प्रस्तावित बिजली परियोजनाओं के बजाए अपने मौजूदा हीराकुंड स्थित 67.5 मेगावाट के कैप्टिव पावर प्लांट में इस कोयले का इस्तेमाल किया. साथ ही यह भी आरोप लगाया गया था कि कंपनी ने निर्धारित सीमा से अधिक कोयला खनन कर अनुचित लाभ कमाया और संशोधित खनन योजना की मंजूरी के दौरान मंत्रालय को गुमराह किया.
हालांकि अदालत ने पाया कि जिस शर्त के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था, वह बाद में ओडिशा सरकार और कंपनी के बीच हुए खनन पट्टे का हिस्सा ही नही था. कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि कोयला ब्लॉक से जुड़े अधिकार और दायित्व आवंटन पत्र के बजाए खनन पट्टे से निर्धारित होते है.
कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसा ठोस आधार नही है जिससे माना जाए कि कंपनी अधिकारियों के कथित बयानों ने सरकारी अधिकारियों को कोई ऐसी मंजूरी देने के लिए प्रेरित किया, जिसे वे अन्यथा अस्वीकार कर देते. कोर्ट ने सीबीआई के आरोपों को खारिज करते हुए केस बंद कर दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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