आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज के खिलाफ दर्ज आपराधिक मानहानि मामले में दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट आगामी 10 अक्टूबर को अपना फैसला सुनाएगी. कोर्ट यह तय करेगा कि भारद्वाज को मामले में समन जारी किया जाए या नहीं.
दिल्ली के भाजपा नेता और मंत्री प्रवेश वर्मा ने सौरभ भारद्वाज पर झूठे आरोप लगाकर उनकी छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए यह आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई है.
कोर्ट ने पक्ष सुनने के बाद सुरक्षित रखा फैसला
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नेहा मित्तल की अदालत ने मामले में संज्ञान लेने से पहले सौरभ भारद्वाज का पक्ष सुना और सभी पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है. इससे पहले 4 जुलाई को प्रवेश वर्मा का बयान कोर्ट में दर्ज किया गया था.
अपने बयान में वर्मा ने कहा था कि मई 2026 में सौरभ भारद्वाज ने ‘एक्स’, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उनके खिलाफ बेहद आपत्तिजनक, झूठे और मानहानिकारक आरोप लगाए थे, जिससे उनकी और उनके परिवार की सामाजिक तथा राजनीतिक प्रतिष्ठा को गहरा धक्का पहुंचा है.
क्या हैं आरोप और पूरा विवाद?
दरअसल, सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया था कि प्रवेश वर्मा ने ‘एस. एस. मोटा सिंह स्कूल ट्रस्ट’ में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने करीबी सहयोगियों की नियुक्तियां कराई हैं. भारद्वाज ने यह दावा भी किया था कि इस ट्रस्ट के पास करीब 500 करोड़ रुपये की संपत्ति है.
इसके अलावा, उन पर यह आरोप लगाने का भी दावा है कि उन्होंने पॉक्सो (POCSO) मामले में आरोपी स्कूल कर्मचारियों का पक्ष लिया था. प्रवेश वर्मा ने इन सभी दावों को पूरी तरह निराधार, कल्पित और भ्रामक बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है.
सिविल कोर्ट में 5 करोड़ रुपये का हर्जाना
आपराधिक मानहानि शिकायत के अलावा, प्रवेश वर्मा ने इसी मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में सिविल मानहानि का मुकदमा भी दायर कर रखा है. हाई कोर्ट में दायर इस याचिका के जरिए वर्मा ने सौरभ भारद्वाज से 5 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है, जिस पर अलग से कानूनी कार्यवाही चल रही है.
-भारत एक्सप्रेस
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