Rouse Avenue Court
दिल्ली के राऊज एवेन्यु कोर्ट ने नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले में आरोपी मांगीलाल बिवाल, विकास बिवाल, दिनेश बिवाल, यश यादव और धनंजय लोखंडे को 15 जून तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. सभी की न्यायिक हिरासत की अवधि खत्म होने के बाद सीबीआई के स्पेशल जज अजय गुप्ता की कोर्ट में पेश किया गया, जिसके बाद कोर्ट ने न्यायिक हिरासत की अवधि को बढ़ा दिया.
आरोपी यश यादव ने मांगी नीट की किताबें रखने की अनुमति
वहीं आरोपी यश यादव की अर्जी को राऊज एवेन्यु कोर्ट ने स्वीकार कर लिया. यश यादव ने किताबें रखने की अनुमति देने की मांग की है. यश यादव ने नीट यूजी परीक्षा की तैयारी के लिए किताबें रखने की अनुमति मांगी है, जिसपर कोर्ट 21 जून को सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने बताया था कि यश यादव को टेलीग्राम के जरिये पेपर मिले. सीबीआई ने कोर्ट को यह भी बताया था कि टेलीग्राम और व्हाट्सएप के जरिये जो पेपर बरामद हुए हैं, वो नीट में आने वाले पेपर के हूबहू हैं. यश यादव का फोन भी बरामद किया गया है, जिससे इन्क्रिमिनेटिंग (आपत्तिजनक) सबूत मिले.
व्यापक साजिश और प्रिंटिंग प्रेस की भूमिका की जांच
सीबीआई ने बताया था कि हमें व्यापक साजिश की जांच करनी है. इसमें पब्लिक सर्वेंट या सरकारी कर्मचारी की क्या भूमिका है, प्रिंटिंग प्रेस की भूमिका क्या है? ये सब जांचने के लिए हमें आरोपियों की रिमांड लेनी है. शुभम ने यश यादव को प्रश्न पत्र दिए थे. सीबीआई ने शुभम खैरनार को नासिक से, मांगीलाल बिवाल, विकास बिवाल व दिनेश बिवाल को जयपुर राजस्थान से और यश यादव को हरियाणा से गिरफ्तार किया था. सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और लोक परीक्षा (अनुचित साधनों से निवारण) अधिनियम, 2024 की अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है.
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दिनेश के परिवार के 5 बच्चों के 2025 सिलेक्शन की भी जांच
सूत्रों के मुताबिक मास्टरमाइंड दिनेश लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में था. जांच एजेंसियों के सामने सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह आया है कि दिनेश के परिवार के पांच बच्चों का वर्ष 2025 में सरकारी मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस (MBBS) पाठ्यक्रम में चयन हुआ था. खुद आरोपी ने भी सोशल मीडिया पर नवंबर 2025 में इसे परिवार के लिए गर्व का विषय बताते हुए पोस्ट किया था. सीबीआई यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं इन अभ्यर्थियों को भी अवैध तरीके से 2025 की परीक्षा में लाभ तो नहीं पहुंचाया गया था. फिलहाल सीबीआई की टीम पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हुई है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पेपर लीक की जड़ें कितनी गहरी हैं.
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