सहारा-सेबी फंड
Sahara India Refund 2025: सुप्रीम कोर्ट ने सहारा-सेबी विवाद मामले में केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए सेबी में जमा 24,979 करोड़ रुपये में से 5,000 करोड़ रुपये की राशि जमाकर्ताओं के बीच वितरित करने की अनुमति दे दी है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश दिया. इस राशि को केंद्रीय पंजीयक को हस्तांतरित किया जाएगा, जो इसे सहारा समूह के जमाकर्ताओं के बीच वितरित करेंगे.
भुगतान की समय सीमा दिसंबर 2026 तक बढ़ा दी गई है. मार्च 2023 के आदेश और वर्तमान आदेश के अनुसार निवेशकों को जारी की गई राशि के वितरण की समय सीमा भी 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दी गई है. सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुबाश रेड्डी और अधिवक्ता गौरव अग्रवाल को निगरानी और वितरण प्रक्रिया में सहायता करने के लिए नियुक्त किया है.
केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई
कोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए सहारा समूह द्वारा भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) में जमा 24,979.67 करोड़ रुपये में से 5,000 करोड़ रुपये की नई किश्त जारी करने की अनुमति दी है. यह राशि सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ को हस्तांतरित की जाएगी, जो इसे असली जमाकर्ताओं के बीच वितरित करेगा.
32 लाख निवेशक कर पाएंगे दावा
वितरण प्रक्रिया की निगरानी पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे. वह सुनिश्चित करेंगे कि राशि का वितरण पारदर्शी तरीके से और उचित पहचान के बाद किया जाए. मार्च 2023 के आदेश और वर्तमान आदेश के तहत निवेशकों को भुगतान की समयसीमा 31 दिसंबर, 2026 तक बढ़ा दी गई है. अनुमान है कि मौजूदा गति से लगभग 32 लाख और निवेशक दिसंबर 2026 तक दावे कर सकते हैं.
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किस आवेदन पर आया आदेश
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है. यह आदेश केंद्र सरकार की ओर से दाखिल एक आवेदन पर आया है, जो पिनाक पाणि मोहंती नामक व्यक्ति की दायर जनहित याचिका में लगाया गया था. इसमें मांग की गई थी कि सहारा क्रेडिट फर्मों और अन्य चिटफंड कंपनियों में निवेश करने वाले जमाकर्ताओं को भुगतान कराया जाए.
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