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सुप्रीम कोर्ट 18 दिसंबर को सुनेगा इच्छामृत्यु याचिका, हरीश की 12 साल से पूर्ण विकलांगता

सुप्रीम कोर्ट ने हरीश की दयनीय हालत पर चिंता जताई. 31 वर्षीय हरीश क्वाड्रिप्लेजिया से पीड़ित हैं और पिछले 12 साल से बिस्तर पर हैं. परिवार ने देखभाल के लिए लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है.

Edited by Radha Priya

31 साल के बेटे के लिए इच्छामृत्यु की मांग वाली बुजुर्ग माता-पिता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 18 दिसंबर को सुनवाई करेगा. कोर्ट ने एम्स के निदेशक से जांच के लिए एक सेकेंड चिकित्सा बोर्ड गठित करने और बुधवार तक रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है.

कोर्ट 18 दिसंबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान नोएडा जिला अस्पताल की एक मेडिकल टीम ने कोर्ट को बताया कि 31 साल के व्यक्ति के ठीक होने की कोई उम्मीद नही है, जो पिछले 12 वर्षों से पूर्णतः विकलांग है और स्थायी रूप से कोमा जैसी स्थिति में है.

सुप्रीम कोर्ट ने हरीश की दयनीय हालत पर जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उस व्यक्ति की हालत दयनीय है और कुछ करना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम उसे इस हालत में जीने नहीं दे सकते. गाजियाबाद के सीएमओ द्वारा दायर रिपोर्ट की जांच करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह गंभीर बेड सोर से पीड़ित हैं, जिसका अर्थ है कि उनकी ठीक से देखभाल नहीं की जा रही थी.

कोर्ट ने कहा कि सीलबंद लिफाफे में दायर रिपोर्ट में कहा गया है कि उनके ठीक होने की कोई संभावना नहीं है. इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था. हरीश जिंदा है उसकी अभी सांसे चल रही है लेकिन वो 11 साल से विस्तर पर पड़ा हुआ है. क्वाड्रिप्लेजिया से पीड़ित, यानी 100 फीसदी विकलांगता से ग्रसित है. याचिका में कहा गया है कि हरीश एक जिंदा कंकाल की तरह 2013 से उसी विस्तर पर यू ही पड़ा हुआ है.

परिवार ने हरीश की देखभाल के लिए खर्च किए लाखों

माता-पिता का कहना है कि हम हमेशा टी उसके पास नहीं रहेंगे, तो फिर उसका देखभाल कौन करेगा. राज सैट एयर कैटरिंग लिमिटेड में काम करने वाले पीड़ित के पिता ने बताया हमने एक साल तक हरीश की देखभाल के लिए 27000 रुपये प्रति माह के हिसाब से एक नर्स को रखा था. यह रकम उस समय मेरे 28000 रुपये के मासिक वेतन के लगभग बराबर थी.

फिलहाल हरीश का हर महीने का मेडिकल खर्च 20000-25000 रुपये है, जिसमें दवाइयां, खाना और बेडसोर के ईलाज जैसी दूसरी जरूरी चीजें शामिल है. उनके मुताबिक, सरकार से कोई मदद नही मिल रही है और हम उसके मेडिकल खर्च वहन नहीं कर सकते है. हम ही जानते हैं कि हम कैसे काम चला रहे हैं. हालांकि हरीश के अस्पताल में भर्ती होने पर परिवार को एक बार केंद्र सरकार की योजना से 50000 रुपये की आर्थिक मदद मिली थी.

-भारत एक्सप्रेस



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