17 साल पुराने हत्या के प्रयास के मामले में समाजसेवी मधु किश्वर को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. हाई कोर्ट ने मामले को रद्द कर दिया है. मधु किश्वर के खिलाफ 2008 में मामला दर्ज किया गया था. जस्टिस अमित महाजन ने मामले को रद्द करते हुए कहा कि दुर्भावनापूर्ण और बदले की भावना से यह मामला दायर किया गया था.
अधिकतम आत्मरक्षा का मामला- कोर्ट
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह एफआईआर पहले से दर्ज मुकदमे का बदले की भावना से दायर की गई थी. कोर्ट ने यह भी कहा कि बसोया परिवार पहले ही इस घटना से जुड़े एक मामले में दोषी ठहराया जा चुका है, इसलिए किश्वर के खिलाफ केस जारी रखना उचित नहीं है. कोर्ट ने कहा कि अगर शिकायतकर्ता के आरोपों को सबसे ऊंचे स्तर पर भी माना जाए, तब भी यह अधिकतम आत्मरक्षा या विवाद का मामला माना जा सकता है, जब शिकायतकर्ता ने अवैध रूप से एकत्र होकर किश्वर और उनके ड्राइवर पर हमला किया था.
गाड़ी से कुचलने का मिला था निर्देश
बतादें कि बसोया परिवार ने साल 2008 में उस समय यह मुकदमा दायर कराई थी, जिस समय मधु किश्वर के संगठन मनुषी द्वारा चलाए जा रहे एक प्रोजेक्ट को लेकर सेवा नगर स्ट्रीट वेंडर्स मार्केट की तस्वीरें ले रही थी. बसोया परिवार ने धारा 307 (हत्या का प्रयास), धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुचाना), धारा 506 (आपराधिक धमकी) और धारा 34 (समान इरादा) के तहत मामला दर्ज किया गया था.
बसोया परिवार ने आरोप लगाया था कि किश्वर ने झगड़े के दौरान अपने ड्राइवर को उन्हीं गाड़ी से कुचलने का निर्देश दिया था. मामले की सुनवाई के दौरान मधु किश्वर की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया था कि बसोया परिवार इलाके में अवैध कारोबार चलाता है उसी दिन उन्होंने उनके खिलाफ भी मारपीट की शिकायत दर्ज कराई थी. जिसमें बसोया परिवार को दोषी ठहराया गया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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