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‘साबित नहीं हुआ गैरकानूनी जमावड़ा’, राऊज एवेन्यु कोर्ट ने सोमनाथ भारती को दी बड़ी राहत

राऊज एवेन्यु कोर्ट ने ‘खिड़की एक्सटेंशन मिडनाइट रेड’ मामले में पूर्व कानून मंत्री सोमनाथ भारती समेत सभी 17 आरोपियों को बरी कर दिया है. अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष न तो गैरकानूनी जमावड़े के आरोपों को साबित कर पाया और न ही पीड़ितों को अदालत में पेश कर सका.

Somnath Bharti Acquitted in 2014 Khirki Extension Midnight Raid Case
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री सोमनाथ भारती को राऊज एवेन्यु कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. कोर्ट ने सोमनाथ भारती सहित 17 अन्य आरोपियों को 2014 के बहुचर्चित खड़की एक्सटेंशन मिडनाइट रेड’ मामले में बरी कर दिया है. राऊज एवेन्यु कोर्ट के एडिशनल चीफ ज्युडिशयल मजिस्ट्रेट नेहा मित्तल ने यह फैसला सुनाया है.

गैरकानूनी जमावड़ा साबित नहीं हुआ

कोर्ट ने अपने मौखिक रूप से कहा कि पीड़ितों के बयान मान्य नहीं माने जा सकते हैं, क्योंकि वे अदालत में पेश नही हुई. गैरकानूनी जमावड़े का कोई भी मामला साबित नहीं हो पाया. अभियोजन पक्ष आरोपो को साबित करने में नाकाम रहा है. कोर्ट ने ये भी कहा कि अभियोजन पक्ष केस दर्ज करने में हुई देरी को भी सिद्ध नहीं कर पाया.

ये मामला वर्ष 2014 का है, जिसमें 9 अफ्रीकन महिलाओं ने उनके कानून मंत्री रहने के दौरान शिकायत दर्ज कराई थी. सोमनाथ भारती को शिकायत मिली थी कि अफ्रीकन मूल युगांडा निवासी महिलाएं ड्रग्स और सेक्स रैकेट चला रही हैं. इसके बाद सोमनाथ भारती अपने समर्थकों के साथ भीड़ लेकर खिड़की एक्सटेंशन पहुंच गए.

मामले में फसाया गया सोमनाथ भारती

सोमनाथ भारती ने उन महिलाओं के घर पर गैर कानूनी तरीके से छापा मारा था. आरोप है कि इस दौरान सोमनाथ भारती और उनके समर्थकों ने अफ्रीकी महिलाओं के साथ छेड़छाड़, बदसलूकी, धमकी और मारपीट भी की थी.

हालांकि सोमनाथ भारती ने कहा है कि इस मामले में उन्हें फंसाया गया है. इस मामले में सोमनाथ भारती के अलावा 16 अन्य लोगों के खिलाफ कई संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई थी. कोर्ट ने सोमनाथ भारती और 15 अन्य को आईपीसी की धारा 323, 354, 354C, 153A, 147, 143, 452, 186, 506, 509, 427, 342 और 34 के तहत आरोपी माना था.

क्या है आरोप?

कोर्ट ने अपने विस्तृत आदेश में कहा था कि इस बात के पर्याप्त साक्ष्य हैं कि पीड़ित महिलाओं में से कुछ को पीटा गया, उन्हें चोट पहुचाई. कुछ महिलाओं का आरोप है कि भीड़ के सामने पेशाब करने के लिए उन्हें मजबूर किया गया. इसके अलावा आरोपियों ने पीड़ितों के घर में जबरन एंट्री की कुछ पीड़ितों को उन्हीं की कार में रोक कर रखा गया और इस बीच आरोपी लगातार नस्लभेदी टिप्पणी करते रहे.

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-भारत एक्सप्रेस



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