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विधायी विशेषाधिकार मामला: सुभाषिनी अली और PUCL ने SC में दायर की याचिका

स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा के बाद पूर्व सांसद सुभाषिनी अली और एनजीओ PUCL ने भी सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर की है. 6 अक्टूबर को 7 जजों की बेंच सुनवाई करेगी.

SUPREME-COURT

स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा के बाद अब माकपा की पूर्व सांसद सुभाषिनी अली और मानवाधिकार संगठन पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) ने भी सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका (Intervention Application) दायर कर दी है. यह पूरा मामला सात जजों की संविधान पीठ (Constitution Bench) के पास लंबित है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट आगामी 6 अक्टूबर को सुनवाई करेगा.

याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांग और संवैधानिक मुद्दे

सुभाषिनी अली और PUCL की ओर से दायर अर्जी में मांग की गई है कि विधायी विशेषाधिकार से जुड़े सात जजों की बेंच के पास लंबित इस महत्वपूर्ण मामले में उन्हें भी पक्षकार (Party) बनाया जाए. अर्जी में इस बात पर जोर दिया गया है कि मामला सिर्फ व्यक्तिगत नहीं बल्कि व्यापक संवैधानिक महत्व का है. इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दों पर विचार करने की मांग की गई है:

  • विधायी विशेषाधिकार (Legislative Privileges) और जनता के ‘सूचना के अधिकार’ व ‘प्रेस की स्वतंत्रता’ के बीच का संबंध क्या है?
  • अदालतें किसी विधायिका के विधायी विशेषाधिकार से जुड़े सवालों की किस हद तक न्यायिक समीक्षा (Judicial Scrutiny) या जांच कर सकती हैं?

कुणाल कामरा की याचिका का आधार

इससे पहले स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन से जुड़े इस मामले में हस्तक्षेप की अनुमति मांगी थी. कामरा ने अपनी अर्जी में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट का इस मामले में आने वाला फैसला महाराष्ट्र विधानसभा में उनके खिलाफ चल रही विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई पर सीधा असर डाल सकता है.

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मामले की पृष्ठभूमि: वर्ष 2022 में महाराष्ट्र में हुए राजनीतिक उथल-पुथल, शिवसेना में विभाजन, उद्धव ठाकरे के इस्तीफे और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में नई सरकार बनने के घटनाक्रम पर कुणाल कामरा ने एक कार्यक्रम में व्यंग्य किया था, जिसमें शिंदे के लिए कथित तौर पर ‘गद्दार’ शब्द का इस्तेमाल किया गया था.

एफआईआर और कानूनी संरक्षण: वीडियो सामने आने के बाद विधायक मुर्ज़ी कांजी पटेल की शिकायत पर खार पुलिस स्टेशन में बीएनएस (BNS) की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी. बॉम्बे हाईकोर्ट ने 25 अप्रैल 2025 के अपने आदेश में कामरा को याचिका लंबित रहने तक गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया था. कामरा के अनुसार, इस मामले में अभी तक चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है और मामला हाईकोर्ट में लंबित है.



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