सुप्रीम कोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी के मामले में आरोपी एक नाइजीरियाई नागरिक को मिली जमानत को रद्द करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने न केवल भारत में गंभीर अपराध किया है, बल्कि जमानत मिलने के बाद वह फरार होकर न्यायिक प्रक्रिया से बचने की कोशिश की है.
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ए. जी मसीह की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि भारत और नाइजीरिया के बीच प्रत्यर्पण संधि न होने के कारण आरोपी को वापस लाना कठिन है. अदालत ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से सुझाव दिया कि विदेशी नागरिकों द्वारा अपराध कर देश से भाग जाने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए एक ठोस नीति बनाई जानी चाहिए. अदालत ने कहा कि यह मामला इस बात का उदाहरण है कि किस प्रकार विदेशी आरोपी आसानी से न्याय से बच निकलते हैं.
अदालत ने केंद्र से आग्रह किया गया विदेशों में जांच और अभियोजन से जुड़े मौजूदा दिशा निर्देश की समीक्षा की जाए और व्यवहारिक समाधान तैयार किया जाए. बता दें कि आरोपी भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप है. वर्ष 2022 में झारखंड हाई कोर्ट ने उसे जमानत दी थी, लेकिन उसने शर्ते का उल्लंघन किया और फरार हो गया. कोर्ट ने जमानत देते हुए कहा था कि वह भारत छोड़कर नही जाएगा, पासपोर्ट जमा करने का आदेश दिया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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