सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित सहायक अभियंता (सिविल) प्रतियोगी परीक्षा 2022 में डमी उम्मीदवारों के इस्तेमाल के मामले में कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने राजस्थान सरकार की अपील पर आरोपी इंद्रज सिंह और सलमान खान की जमानत रद्द कर दी है.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि डमी उम्मीदवारों का उपयोग केवल व्यक्तिगत धोखाधड़ी नहीं, बल्कि पूरे भर्ती सिस्टम के खिलाफ गंभीर अपराध है. इससे हजारों मेहनती उम्मीदवारों के भविष्य पर असर पड़ता है और सरकारी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर आंच आती है. कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट की ओर से जमानत दिए जाने के फैसले को गलत ठहराया, यह मानते हुए कि निचली अदालत ने इस अपराध के व्यापक प्रभाव को नजरअंदाज किया.
राजस्थान सरकार की दलील
राजस्थान सरकार की ओर से पेश एडवोकेट जनरल शिव मंगल शर्मा ने कोर्ट में दलील दी कि यह कोई अलग-थलग मामला नहीं, बल्कि सरकारी परीक्षाओं में संगठित नकल और धोखाधड़ी से जुड़ा एक बड़ा रैकेट है. उन्होंने कहा कि सरकारी भर्ती परीक्षाएं योग्यता आधारित प्रणाली की नींव हैं और ऐसी धोखाधड़ी से जनता का सरकार और भर्ती प्रक्रिया में विश्वास कमजोर होगा.
उन्होंने यह भी बताया कि मुख्य आरोपी गुरदीप दास अभी भी फरार है और उसकी गिरफ्तारी के बिना इस पूरे रैकेट का खुलासा नहीं हो सकता. अगर जमानत दी गई, तो जांच प्रभावित होगी और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका बढ़ जाएगी.
50 लाख की डील, 10 लाख का एडवांस भुगतान
राजस्थान विशेष अभियान समूह (SOG) की जांच में यह सामने आया कि इंद्रज सिंह और सलमान खान ने 50 लाख रुपये की डील की थी, जिसके तहत परीक्षा में डमी उम्मीदवार को बैठाने की योजना बनाई गई. इस धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए 10 लाख रुपये का अग्रिम भुगतान किया गया था.
जांच के दौरान इंद्रज सिंह के हस्ताक्षर वाले 18 लाख रुपये के चेक सलमान खान और एक अन्य आरोपी परमेश्वर लाल के पास से बरामद किए गए. कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लोकेशन ट्रैकिंग से भी पुष्टि हुई कि परीक्षा के दिन इंद्रज सिंह परीक्षा केंद्र पर मौजूद नहीं था. उसकी जगह डमी उम्मीदवार गुरदीप दास ने परीक्षा दी.
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता को बनाए रखना बेहद जरूरी है. इस तरह की अनियमितताएं जनता के विश्वास को कमजोर करती हैं, इसलिए इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.
-भारत एक्सप्रेस
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