देश में बढ़ते सड़क हादसों और उनमें होने वाली मौतों पर अंकुश लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक रुख अपनाया है. कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षित सड़कों पर चलना किसी भी नागरिक के लिए केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि उसका मौलिक अधिकार (Fundamental Right) है.
जस्टिस जे. के. महेश्वरी और जस्टिस ए. एस. चंदूरकर की पीठ ने सरकार को याद दिलाया कि नागरिकों को सुरक्षित वातावरण देना राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है. यह फैसला नवंबर 2025 में राजस्थान और तेलंगाना में हुए उन भीषण सड़क हादसों के बाद आया है, जिनमें 34 मासूम जिंदगियां लापरवाही की भेंट चढ़ गई थीं.
सिस्टम की लापरवाही बताया था
देशभर में आए दिन लगातार सड़क हादसे हो रहे है. इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि सुरक्षित सड़क पर चलना हर आदमी का मौलिक अधिकार है. इसे सुरक्षित करना सरकार की जिम्मेदारी है. जस्टिस जे. के महेश्वरी और जस्टिस ए. एस. चंदूरकर की पीठ ने कहा कि जीवन का अधिकार केवल अवैध रूप से जीवन छीनने से सुरक्षा तक सीमित नहीं है.
बल्कि यह राज्य की जिम्मेदारी भी तय करता है कि नागरिकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए. यह मामला नवंबर 2025 में राजस्थान और तेलंगाना में दो जगहों पर हुए भीषण सड़क हादसों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था. कोर्ट दो महीने बाद मामले में अगली सुनवाई करेगा. जिनमें 34 लोगों की मौत हो गई थी. कोर्ट ने इन हादसों को टाले जाने वाला बताते हुए इसे सिस्टम की लापरवाही बताया था.
भविष्य में निर्माण पूरी तरह रोक
कोर्ट ने नेशनल हाइवे पर कहीं भी गाड़ी खड़ी करना पूरी तरह प्रतिबंध होगा. वाहन केवल तय पार्किंग स्थानों पर ही रोके जा सकेंगे. इसके साथ ही हाइवे किनारे बने अवैध ढाबों, दुकानों को लेकर भी कोर्ट ने सख्ती दिखाई है. कोर्ट ने कहा है कि नेशनल हाइवे के राइट ऑफ वे में बने सभी अवैध ढांचे हटाये जाए और भविष्य में ऐसे किसी निर्माण पूरी तरह रोक रहेगी.
60 दिनों के भीतर कार्रवाई पूरी करने का निर्देश
जिला प्रशासन को 60 दिनों के भीतर कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया गया है. कोर्ट ने सड़क हादसों के तुरंत बाद मदद पहुचाने के लिए हर 75 किलोमीटर पर एम्बुलेंस तैनात करने का निर्देश दिया है. इसके अलावे जिन जगहों पर बार-बार हादसे होते है उनकी पहचान कर वहां बेहतर लाइटिंग, कैमरे और चेतावनी बोर्ड लगाने का निर्देश दिया है.
कोर्ट ने सड़क हादसों को लेकर चिंता जताई
कोर्ट ने कहा कि देश के कुल सड़क नेटवर्क में नेशनल हाइवे सिर्फ 2 प्रतिशत है, लेकिन यहां करीब 30 फीसदी सड़क हादसे होते है. जो चिंताजनक है. कोर्ट ने सभी राज्यों और संबंधित एजेंसियों को 75 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का मानना है कि जब तक समाज का सहयोग नहीं मिलेगा, मानवीय व्यवहार नहीं बदलेगा और कानून का डर नहीं होगा.
दुर्घटनाओं से जीडीपी को 3 फीसदी नुकसान
गडकरी के मुताबिक देश में हर साल औसतन 4.80 से 5 लाख सड़क हादसे होती है न, जिसमें लगभग 1.80 लाख लोगों की मौत हो जाती है. उनके मुताबिक इन दुर्घटनाओं से जीडीपी को 3 फीसदी का नुकसान होता है, जो किसी बीमारी या युद्ध से भी अधिक है. सभी दुर्घटनाओं में 66.4 फीसदी मौतें 18 से 45 साल के युवाओं की होती है. जो देश के भविष्य के लिए चिंता का विषय है.
नागरिकों की सुरक्षा के मील का पत्थर साबित हो सकता
वर्ल्ड बैंक के रिकॉर्ड के मुताबिक भारत में दुनिया का सिर्फ एक फीसदी ही वाहन है इसके बावजूद देश में 11 फीसदी हादसे होते है. यह भारत ही नहीं विश्व भर में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या बहुत ज्यादा है. बता दें कि भारत में सड़कों और हाइवे की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है. इसकी रफ्तार कम होने का नाम नहीं ले रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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