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NSE की पूर्व एमडी चित्रा रामकृष्ण को सुप्रीम कोर्ट से झटका, भ्रष्टाचार निवारण कानून मामले में राहत नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने एनएसई की पूर्व एमडी चित्रा रामकृष्ण को राहत देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत लोक सेवक की परिभाषा को चुनौती देने वाली याचिका पर हस्तक्षेप करने से मना कर दिया है.

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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ चित्रा रामकृष्ण को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है. जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है, जिसमें रामकृष्ण की उस याचिका को खारिज कर दिया गया था जिसमें उन्होंने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत ‘लोक सेवक’ (Public Servant) और ‘लोक सेवा’ की परिभाषा को चुनौती दी थी.

चित्रा रामकृष्ण के वकीलों की दलीलें

सुनवाई के दौरान चित्रा रामकृष्ण की ओर से पेश वरिष्ठ वकील बलबीर सिंह ने तर्क दिया कि एनएसई एक निजी और गैर-सरकारी कंपनी है, इसलिए इसके किसी भी अधिकारी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत ‘लोक सेवक’ नहीं माना जा सकता. उन्होंने कहा कि वह भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत चल रही कानूनी कार्यवाही का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन पर भ्रष्टाचार निवारण कानून के प्रावधान लागू नहीं किए जा सकते.

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या चित्रा रामकृष्ण ने ट्रायल कोर्ट के समक्ष डिस्चार्ज (मुक्ति) अर्जी दाखिल की है या नहीं. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि विशेष अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि आरोपी ‘पब्लिक सर्वेंट’ नहीं है, तो इससे उस विशेष अदालत का अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) खत्म नहीं हो जाता. कोर्ट ने कहा कि इस कानूनी मुद्दे को निचली अदालत में चल रहे ट्रायल के दौरान उठाया जा सकता है.

दिल्ली हाई कोर्ट का पूर्व फैसला

इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि एनएसई एक ऐसा संस्थान है जो सार्वजनिक हित से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य करता है, इसलिए इसके अधिकारियों को सार्वजनिक कर्तव्य (Public Duty) निभाने वाले माना जाएगा. कोर्ट ने कहा था कि चूंकि चित्रा रामकृष्ण एनएसई की एमडी और सीईओ थीं, इसलिए उनके पदों और कृत्यों को एनएसई के सार्वजनिक हित से जुड़े कार्यों से अलग करके नहीं देखा जा सकता.

रामकृष्ण ने हाई कोर्ट में दलील दी थी कि भ्रष्टाचार निवारण कानून में ‘लोक सेवक’ की परिभाषा का दायरा इतना बढ़ा दिया गया है कि अब निजी संस्थाओं में काम करने वाले लोगों के खिलाफ भी भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए जा रहे हैं, जो कि कानून के अनुरूप नहीं है.

क्या है पूरा मामला?

चित्रा रामकृष्ण वर्ष 2013 से 2016 तक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की एमडी और सीईओ रहीं. वर्ष 2013 में उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन 2016 में पद के दुरुपयोग और एक बड़े घोटाले में नाम जुड़ने के बाद उन्हें एनएसई से हटना पड़ा था. चित्रा पर आरोप है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई ऐसे निर्णय लिए जो शेयर बाजार के हित में नहीं थे. इनमें सबसे प्रमुख मामला आनंद सुब्रमण्यम की नियुक्ति का था, जिनके लिए उन्होंने एनएसई में विशेष रूप से एक नए अधिकारी स्तर का पद सृजित किया था और अपने कार्यकाल के दौरान उन्हें लगातार पदोन्नतियां दी थीं.



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