साल 2016 में कर्नाटक के धारदाड जिले में बीजेपी कार्यकर्ता योगेश गौड़ा की हत्या के मामले में जमानत पर बाहर आए कर्नाटक के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता विनय कुलकर्णी की जमानत को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 5 जून को सुनवाई करेगा. जस्टिस संजय करोल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट को अगली तारीख तक किसी भी गवाह से पूछताछ नहीं करनी चाहिए. यह याचिका सीबीआई की ओर से दायर की गई है.
गवाहों को प्रभावित करने का आरोप
मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश एएसजी एसवी राजू ने गवाहों को प्रभावित करने का आरोप लगाया. जिसपर कुलकर्णी की ओर से पेश वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए अगले सप्ताह तक का समय मांगा है. बता दें कि कुलकर्णी से सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली हुई है.
कुलकर्णी को सुप्रीम कोर्ट से मिली है जमानत
जमानत पर बाहर आने के बाद कुलकर्णी ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है, मुझे निर्दोष के रूप में बाहर आने का भरोसा था. मुझे न्यायपालिका में विश्वास है. मेरे पास धार्मिक संतों और निर्वाचन क्षेत्र के लोगों का आशीर्वाद भी हैं. मैं एक अलग राजनेता हूं. अमीर और गरीब मेरे साथ है. लोगों ने मुझे और मेरा समर्थन किया है पूरे परिवार में और मैं उनका आभारी हूं.
2016 में जिम में हुई थी योगेश गौड़ा की हत्या
15 जून 2016 को कुलकर्णी के मुखर आलोचक योगेश गौड़ा की धारवाड़ के सप्तपुर में पांच बदमाशों द्वारा उस समय हत्या कर दी गई थी. जब वे जिम में थे. पूरी घटना जिम में लगे सीसीटीवी में कैद हो गई थी. हत्यारों ने पहले उनकी आंखों में चिली पाउडर झोंका और फिर उन्हें मौत के घाट उतारकर दो पहिया से फरार हो गए.
CBI ने 2019 में शुरू की थी जांच
सीबीआई ने सितंबर 2019 में मामले की जांच शुरू की थी. योगेश के परिजनों ने तत्कालीन मंत्री और विधायक विनय कुलकर्णी पर हत्या का साजिश का आरोप लगाया था. इसमें पांच आरोपियों की पहचान कुलकर्णी के करीबी सहयोगियों के रूप में हुई थी. इस मामले में आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई है.
CBI का दावा – हत्या के पीछे राजनीतिक कारण
इस मामले में सीबीआई ने जिन लोगों को आरोपी बनाया था, उनमें से संतोष सवदत्ती, दिनेश एम सुनील केएस, हर्षिता, अश्वत एस नजीर अहमद, शानवाज और नूतन केएस शामिल थे. उस दौरान विनय कुलकर्णी का नाम नहीं था. सीबीआई का मानना है कि योगेश की हत्या राजनीतिक कारणों से की गई थी.
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