Bharat Express DD Free Dish

चाइल्ड कस्टडी मामले में कोर्ट ने माता-पिता से मतभेद सुलझाने का आग्रह किया

सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवाद और चाइल्ड कस्टडी मामले में कहा कि शादी में कोई भी पति या पत्नी पूरी तरह स्वतंत्र नहीं हो सकता हैं. कोर्ट ने बच्चों के हित में माता-पिता से मतभेद सुलझाने का आग्रह किया हैं.

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़ा चाइल्ड कस्टडी के मामले में सुप्रीम कोर्ट दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि वैवाहिक रिश्ते में कोई भी पति या पत्नी यह नही कह सकता कि वे पूरी तरह स्वतंत्र होकर जीना चाहते है. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने यह टिप्पणी की है. पीठ ने कहा कि विवाह का मतलब क्या है? दो आत्माओं और दो व्यक्तियों का साथ आना है. कोर्ट ने कहा आप स्वतंत्र कैसे हो सकते है. कोर्ट 16 सितंबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.

बच्चों के हित में मतभेद सुलझाने का आग्रह

कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति स्वतंत्र रहना चाहता है तो उसे विवाह के बंधन में नही बधना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि अगर वे एक साथ आते है तो खुशी होगी, क्योंकि बच्चे बहुत छोटे है. उनका क्या दोष है कि उन्हें टूटा हुआ घर मिला है. जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि छोटे बच्चों को टूटे हुए परिवार का बोझ क्यों झेलना पड़े. कोर्ट ने दोनों पक्षों से अपने मतभेदों को सुलझाने का आग्रह करते हुए कहा कि हर पति-पत्नी का आपस में कोई न कोई विवाद होता ही है. कोर्ट ने कहा कि अगर पति-पत्नी साथ आते हैं तो बच्चों के लिए यह सबसे अच्छा होगा. पत्नी विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुप्रीम कोर्ट में पेश होकर कहा कि एक हाथ से ताली नहीं बजती है, जिसपर जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि कोर्ट का यह संदेश दोनों के लिए है.

सुनवाई के दौरान महिला ने दावा किया कि उसका पति, जो सिंगापुर में रहता है और वर्तमान में भारत में है, वह मामले को सुलझाने के लिए तैयार नही है और केवल मुलाकात का अधिकार और बच्चों की कस्टडी चाहता है. दंपत्ति के  दो नाबालिग बच्चों हैं. सुनवाई के दौरान महिला ने यह भी दावा किया कि उसे अलग हुए पति से कोई भरण-पोषण नही मिला है. इसपर कोर्ट ने कहा कि पति को आपको और दोनों बच्चों का भरण पोषण करना होगा. कोर्ट नेपत्नी और बच्चों की भरण-पोषण के लिए कुछ राशि जमा करने का सुझाव दिया है.

पांच लाख रुपए जमा करने का निर्देश

हालांकि पत्नी ने कहा कि वह पति पर निर्भर नही रहना चाहती है. इसपर जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि आप यह नही कह सकती कि मैं किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहती. फिर आपने शादी क्यों की? जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि मुझे नही पता, मैं पुराने ख्याल की हो सकती हूं, लेकिन कोई भी पत्नी यह नहीं कह सकती कि मैं अपने पति पर निर्भर नहीं रहना चाहती. जिसके बाद पत्नी ने इस मुद्दे पर विचार अदालत से कुछ समय की मांग की. कोर्ट ने पति को निर्देश दिया कि पत्नी और बच्चों की भरण पोषण के लिए पांच लाख रुपए जमा करने का निर्देश दिया है.


ये भी पढ़े: इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 41 साल बाद हत्या के केस में उम्रकैद पाए आरोपी को बरी किया


भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read

Latest