वक्फ बोर्ड अधिनियम में बदलाव कर सकती है केंद्र सरकार.
वक्फ अधिनियम 1995 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार सहित सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांग है. साथ ही कोर्ट ने याचिका को मूल याचिका के साथ टैग कर दिया है. सीजेआई बी. आर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने यह आदेश दिया है.
मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई बीआर गवई ने याचिकाकर्ता के वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय से पूछा कि अब आप 1995 के अधिनियम को भी चुनौती दे रहे हैं, जबकि इसे 2025 में चुनौती देना देरी का मामला है. याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी पूजा स्थलों से संबंधित कानून और अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम की वैधता को लेकर याचिकाओं पर सुनवाई कर चुका है.
कई धाराओं को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की
याचिकाकर्ता ने वक्फ अधिनियम 1995 की धारा 3(R), 4,5,6 (1), 7(1), 8, 28, 29, 33, 36, 41, 52, 83, 85, 89 और 101 को असंवैधानिक करार देने की मांग की गई है. यह भी कहा गया है कि ये प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21, 25, 27 और 300 A के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है.
बता दें कि इससे पहले अधिवक्ता हरि शंकर जैन और नोएडा निवासी पारुल खेड़ा ने इन्ही मांगो को लेकर याचिका दायर कर चुकी है. जिसपर कोर्ट सुनवाई कर रहा है. इन दोनों ने अपनी याचिका में मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार को निर्देश दे कि वह उन व्यक्तिगत या धार्मिक हिंदू संपत्तियों की पहचान करे जो वक्फ द्वारा ली गई है.
गैर-मुस्लिमों की संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर चिंता
वक्फ अधिनियम की धारा 4 और धारा 5 के दायरे से हिंदुओं/गैर-मुस्लिमों को बाहर करना और धारा 6(1) और 7(1) के तहत पीड़ित किसी भी व्यक्ति को बाहर करना. वक्फ से संबंधित विवादों में हिंदुओं/गैर-मुस्लिमों को सिविल न्यायालयों में जाने की अनुमति देना और गैर मुसलमानों को वक्फ अधिनियम की धारा 83 और 85 के दायरे से बाहर रखा जाए. वक्फ बोर्ड और गैर-मुस्लिमों की संपत्तियों के बीच विवादों का फैसला वक्फ ट्रिब्यूनल के बजाए सिविल कोर्ट द्वारा किया जाना चाहिए. पारुल खेड़ा ने अपनी याचिका में कहा है कि 1995 के.
वक्फ अधिनियम और 2025 के संशोधन में गैर-मुस्लिमों की संपत्तियों को वक्फ भूमि या सरकारी जमीन घोषित किए जाने से बचाने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नही है. याचिका में यह भी कहा गया है कि वक्फ अधिनियम में ऐसे प्रावधान जोड़े जाए, जिससे गैर-मुस्लिमों की संपत्ति की सुरक्षा हो सके और सभी धार्मिक संस्थाओं को समान अधिकार मिल सकें.
-भारत एक्सप्रेस
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