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ऑनलाइन सट्टेबाजी पर बैन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को नोटिस, राज्यों को भी पक्ष बनाने के संकेत

ऑनलाइन सट्टेबाजी पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राज्यों को भी पक्ष बनाने की सलाह दी और ऐप स्टोर से बेटिंग ऐप हटाने की मांग पर अंतरिम राहत से इनकार किया.

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ऑनलाइन सट्टेबाजी पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर की बेंच ने ईसाई धर्म प्रचारक के. एल पॉल की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह नोटिस जारी किया है.

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि इस मामले को अदालत ने निपटा दिया है. लोग अपनी.मर्जी से ये काम कर रहे हैं. क्या किया जा सकता है. इसे रोका जाना चाहिए, लेकिन आप गलतफहमी में है कि इसे कानून के जरिए रोका जा सकता है. ठीक वैसे ही जैसे हम कानून के बावजूद लोगों को हत्या करने से नही रोक सकते. कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो इसमें राज्यों को भी पार्टी बनाया जाएगा.

याचिकाकर्ता ने प्ले स्टोर और ऐप्पल के ऐप स्टोर से ऑनलाइन बेटिंग ऐप हटाने की मांग की, लेकिन कोर्ट ने कोई अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया. याचिकाकर्ता ने कहा कि सट्टेबाजी के कारण लाखों युवाओं की जिंदगी बर्बाद हो रही है और उनके माता-पिता भी परेशान है. याचिकाकर्ता ने कहा कि अकेले तेलंगाना में हजारों लोगों ने इसमें अपने पैसे गंवाने के बाद 1023 लोगों ने आत्महत्या कर ली है.

याचिकाकर्ता ने कहा कि सिगरेट के डिब्बे पर भी स्वास्थ्य को नुकसान की चेतावनी लिखी होती है. ऐसी कोई चेतावनी ऑनलाइन बेटिंग ऐप नहीं देते. याचिकाकर्ता ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि शीर्ष क्रिकेटर आईपीएल के दौरान सट्टेबाजी का समर्थन कर रहे हैं. इसमें 25 बॉलीवुड और टॉलीवुड से जुड़े प्रभावशाली लोग इन ऐप को प्रमोट कर रहे है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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