राजस्थान के कोटा में छात्रों द्वारा किए जा रहे आत्महत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर दर्ज नही करने पर नाराजगी जताई है. जस्टिस जे. बी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन क्यों नही किया गया. कोर्ट ने कहा कि इस साल अब तक 14 छात्र-छात्राएं आत्महत्या कर चुके हैं.
कोर्ट ने कोटा के पुलिस अधिकारी को 14 जुलाई को तलब किया है. कोर्ट ने पूछा कि एक राज्य के तौर पर आप क्या कर रहे हैं, आपने इस बारे में क्या किया है, क्या आपने राज्य के तौर पर इस पर कोई विचार किया.
कोर्ट ने पूछा इस मामले में एसआईटी ने क्या किया है. जिसपर राजस्थान सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि कोटा पुलिस द्वारा पहले ही रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है. मामले में जांच चल रही है. जल्द एफआईआर भी दर्ज की जाएगी. जबकि सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि इस मामले में अब तक कोई एफआईआर दर्ज नही की गई है. आप हमारे फैसले का अवमानना कर रहे है.
सरकार से पूछा अब तक क्या कदम उठाए गए?
कोर्ट ने सरकार से पूछा कि कोटा में अब तक कितने छात्रों की मौत हुई है? ये छात्र क्यों मर रहे हैं. कोर्ट ने आईआईटी खड़गपुर के 22 वर्षीय छात्र के मौत के मामले में सवाल उठाया और पूछा कि एफआईआर दर्ज करने में 4 दिन का समय क्यों लगा. मई को नीट परीक्षा से कुछ घंटे पहले कोटा के हॉस्टल में 17 साल की छात्रा का शव मिला था. दोनों मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने 6 मई को स्वतः संज्ञान लिया था.
राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि राजस्थान में अप्राकृतिक छात्र मौत और आत्महत्या के सभी मामलों की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा एक विशेष जांच दल (एसआईटी) पहले से ही गठित है, इसलिए इन मुद्दों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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