मध्य प्रदेश के भिंड में पत्रकारों की पिटाई के मामले में दो पत्रकारों की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट 9 जून को अगली सुनवाई करेगा. जस्टिस संजय करोल और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने अंतरिम राहत देने से फिलहाल इनकार कर दिया है.
कोर्ट ने पत्रकारों की ओर से पेश वकील से पूछे कई सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पत्रकारों की ओर से पेश वकील से कई सवाल पूछे, कि आपकी जान को खतरा क्यों है? आपने हमें क्यों नहीं बताया कि आपने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया हैं? कोर्ट ने कहा कि मान लीजिए कि आप हत्या जैसे अपराध करते है, तो क्या हम आपको कोई बलपूर्वक संरक्षण आदेश नहीं से सकते. कोर्ट ने कहा कि हमे जानना होगा कि पुलिस किस तरह के अपराध का आरोप लगा रही है.
दोनों पत्रकारों की ओर से कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका की गई दायर
कोर्ट ने कहा कि आपने पिछले दिनों जो कहानी बनाई थी, वह याचिका में नहीं आई है. बता दें कि दोनों पत्रकारों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की गई है. यह अग्रिम जमानत याचिका शशिकांत गोयल और अमरकांत चौहान की ओर से दायर की गई है. पत्रकारों का आरोप है कि पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय के अंदर उनकी पिटाई की गई है.
पत्रकारों का आरोप
पत्रकारों का आरोप है कि मध्य प्रदेश में भू-माफिया के खिलाफ रिपोर्टिंग के बाद पुलिस उन्हें गिरफ्तार करना चाहती है. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि यह बहुत गंभीर है, पत्रकारों को पुलिस स्टेशन में पीटा गया. वे अब शरण लेने के लिए दिल्ली भागे हैं. उन्हें झूठी गिरफ्तारी और केस का डर है. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि आप हाई कोर्ट क्यों नहीं गए? जिसपर वकील ने कोर्ट को बताया कि उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट ने सुरक्षा दे रखा है.
कोर्ट ने पूछा सवाल
कोर्ट ने पूछा कि हमें अब अखिल भारतीय मामलों पर विचार करना चाहिए, क्योंकि पत्रकार वहां हैं? वकील ने कहा कि वास्तव में उनकी जान को खतरा था। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने घटना की निंदा की है. पत्रकारों का कहना है कि पुलिस की सह पर जिले में रोड़ पर अवैध वसूली चल रही थी. जिसको लेकर पुलिस के खिलाफ खबरों को प्रकाशित किया गया था. जिसके चलते उनकी पिटाई की गई है.
पत्रकारों और उनके परिजनों को झूठे केसों में फंसाने की दी धमकी
इतना ही नहीं पत्रकारों और उनके परिजनों को झूठे केसों में फंसाने की धमकी भी दी. एसपी व थाना प्रभारियों की अभद्रता और मारपीट के बाद पीड़ित पत्रकारों ने अपना घर और जिला छोड़ दिया है. मारपीट के बाद पीड़ित पत्रकारों ने कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव आवेदन देकर अपनी आपबीती बताई है. पुलिस ने एक पत्रकारों को फोन करके धमकी दी और खबर को डिलीट करने को कहा है. सभी पत्रकारों में भय का माहौल है. पुलिस के खिलाफ लिखने व कहने की जिला के अन्य किसी पत्रकारों की हिम्मत नहीं हो रही है.
-भारत एक्सप्रेस
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