लीगल

देशभर के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के मामले में राज्यों को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

देशभर के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के मामले में राज्यों द्वारा जवाब दाखिल नही करने पर सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई है. कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि 16 दिसंबर तक जवाब नहीं देने पर राज्यों के मुख्य सचिव और केंद्रीय गृह सचिव को कोर्ट में मौजूद रहना होगा और बताना होगा कि क्यों नहीं जवाब दाखिल किया गया. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने राज्य सरकार से कहा था कि सीसीटीवी फुटेज को किसी केंद्रीकृत स्थान या एजेंसी को भेजा जाना चाहिए, जहां निगरानी हों.

कोर्ट ने कहा था कि पुलिस थाने का पूछताछ कक्ष वह स्थान है, जहां सीसीटीवी कैमरे होने चाहिए. कोर्ट ने राजस्थान सरकार से पूछा था कि राज्य सरकार ने जो हकफनामा दिया है उसके मुताबिक पूछताछ कक्ष में सीसीटीवी कैमरा नही है. कोर्ट ने कहा था कि सीसीटीवी कैमरे लगाने में लागत तो आएगी, लेकिन यह मानवाधिकार का सवाल है. पिछली सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट किया था कि अब इस मामले में और देरी बर्दाश्त नही की जाएगी.इससे पहले इसको लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को चेतावनी देते हुए स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया था.

मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा था कि अब भी देश भर में पुलिस थानों और केंद्रीय जांच एजेंसियों के अधिकतर दफ्तरों में समुचित सीसीटीवी कैमरे नहीं है. जो कैमरे लगे भी है, वो या तो काम नहीं कर रहे है, उसकी गुणवत्ता भी घटिया है. कैमरे की क़्वालिटी इतनी खराब है कि उसकी ऑडियो अच्छी नही है. धुंधला दिखता है.

सुप्रीम कोर्ट का सुरक्षा और मानवाधिकार पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में सीबीआई, ईडी औरएनआईए सहित अन्य जांच एजेंसियों के दफ्तर में सीसीटीवी कैमरे और रिकॉर्डिंग उपकरण लगाने का निर्देश दिया था.सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि देशभर के प्रत्येक थाने में, सभी प्रवेश और निकास बिंदुओं, मुख्य द्वार, लॉक-अप, कॉरिडोर, लॉबी और रिसेप्शन के अलावे कई अन्य जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया था, ताकि कोई कैमरे की नजर से बच न सके.

इसका उद्देश्य था कि हिरासत में होने वाली पूछताछ के दौरान पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी प्रकार के मानवाधिकार उल्लंघन या पुलिस ज्यादती पर रोक लगाई जा सके.सीसीटीवी फुटेज का इस्तेमाल पुलिस जांच और अदालती कार्यवाही में किया जा सकता है.सीसीटीवी फुटेज से कई ऐसे अहम सबूत मिलते है जो किसी मामले में अंतर पैदा कर सकता है.

ये भी पढ़ें: सबसे युवा एडवोकेट जनरल से लेकर CJI तक… कैसा रहा जस्टिस सूर्यकांत का सफर? जानिए अहम फैसले

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

रेलवे ने खोला पिटारा: जानें 3548 पदों के लिए कौन-कौन कर सकता है अप्लाई?

Indian Railways Jobs: रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने नॉन-टेक्निकल पॉपुलर कैटेगरीज (NTPC) के तहत 3,548…

2 minutes ago

पति शिंजो आबे की याद में भावुक हुईं अकी आबे, पीएम मोदी से मुलाकात के बाद छलके आंसू

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को जापान के पूर्व पीएम दिवंगत शिंजो आबे की पत्नी अकी…

3 minutes ago

प्रेमी ने किसी और से कर ली सगाई, प्रेमिका ने जो किया उसने सबको झकझोर दिया

UP News: कौशांबी में 5 साल पुराने प्रेम संबंध का दुखद अंत हो गया. दूसरी…

12 minutes ago

जल शिक्षा पर प्रधानमंत्री मोदी का जोर सराहनीय, युवा पीढ़ी में जागरूकता बढ़ाने में मिलेगी मदद- सीआर पाटिल

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने गुरुवार को शिक्षा में जल से जुड़े विषयों…

14 minutes ago

धनराज नाथवानी के दिल में पीएम मोदी, क्या बढ़ने वाली है सपा की समस्या?

Dhanraj Nathwani PM Modi Praise: सपा के राज्यसभा उम्मीदवार धनराज नाथवानी ने पीएम मोदी के…

23 minutes ago

पाकिस्तान की नापाक साजिश नाकाम, फिरोजपुर बॉर्डर पर ड्रोन से भेजी गई 100 करोड़ की हेरोइन जब्त

पंजाब के फिरोजपुर में बीएसएफ और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 20 किलो से…

29 minutes ago