हरियाणा के एक साधारण परिवार से आने वाले जस्टिस सूर्यकांत ने आज 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली. शपथ ग्रहण का समारोह राष्ट्रपति भवन में भव्य रूप में आयोजित किया गया था, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें शपथ दिलवाई. समारोह में पीएम मोदी, केंद्रीय मंत्री समेत कई और प्रतिष्ठित लोग मौजूद रहें.
इस बीच आइए जानते है जस्टिस सूर्यकांत के मध्यमवर्गीय परिवार से सीजेआई बनने तक का सफर और उनके द्वारा दिए गए अब तक के ऐतिहासिक फैसले.
साधारण परिवार से शुरू हुआ सफर
जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले के पेटवर गांव में एक मिडिल क्लास परिवार में हुआ. इसलिए उनका बचपन भी सामान्य बीता और गांव के ही स्कूल से शुरुआती पढ़ाई पूरी की. उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए गवर्नमेंट पीजी कॉलेज, हिसार से 1981 में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की.
इसके बाद 1984 में, उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से एलएलबी की पढ़ाई पूरी कर उसी साल हिसार के जिला न्यायालय से वकालत की दुनिया में कदम रखा. 1985 में वे चंडीगढ़ पहुंचे और पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की. जल्द ही संवैधानिक, नागरिक और सेवा मामलों में अपनी गहरी पकड़ बना ली, जिसके कारण वो एक चर्चित नाम बन गए.
सबसे युवा एडवोकेट जनरल
जस्टिस सूर्यकांत ने कई विश्वविद्यालयों, बोर्डों, बैंकों और सरकारी संस्थाओं का प्रतिनिधित्व किया. 7 जुलाई 2000 को उन्हें हरियाणा का सबसे युवा एडवोकेट जनरल नियुक्त किया गया, जिसके बाद मार्च 2001 में वे वरिष्ठ अधिवक्ता (सीनियर एडवोकेट) बने.
वहीं, 9 जनवरी 2004 को उन्हें पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का स्थाई जज नियुक्त किया गया, जो उनकी लाइफ का एक टर्निंग प्वाइंट बना. क्योकि इसके बाद उनका सफर लगातार ऊंचाइयां को छूता रहा. 5 अक्टूबर 2018 को वे हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने और 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नियुक्त हुए.
ऐतिहासिक फैसले लेने वाली बेंच का रहे हिस्सा
न्यायाधीश के तौर पर जस्टिस सूर्यकांत ने कई सारे संवेदनशील मामलों की सुनवाई करने वाली बेंच का हिस्सा रहें है.साथ ही उन्होंने कई ऐतिहासिक फैसले सुनाए. जिसमें से कुछ नीचे है:
- अनुच्छेद 370 हटाने से जुड़े अहम मामले की सुनवाई करने वाली बेंच में शामिल रहे.
- राजद्रोह कानून (Sedition Law) पर नए मामले दर्ज न करने का ऐतिहासिक आदेश.
- राज्यपाल और राष्ट्रपति की शक्तियों पर टिप्पणी करने वाली बेंच का हिस्सा रहे.
- बिहार SIR मामले में उन्होंने चुनाव आयोग को मतदाता सूची से हटाए गए 65 लाख नाम सार्वजनिक करने का आदेश दिया.
- सुप्रीम कोर्ट और अन्य बार एसोसिएशनों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का निर्देश दिया.
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा चूक पर जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की.
- OROP, AMU और पेगासस जैसे कई बड़े मामलों की सुनवाई में शामिल रहे.
आपको बता दें कि मुख्य न्यायाधीश के तौर पर कार्यकाल 15 महीनों का होगा, जो 9 फरवरी 2027 तक चलेगा. इन सब में सबसे खास बात ये है कि जस्टिस सूर्यकांत हरियाणा से आने वाले पहले न्यायाधीश है, जिन्होंने सीजेआई के रूप में शपथ ली.
ये भी पढ़ें: कार्यकाल के आखिरी रोज CJI बीआर गवई ने बताई रिटायरमेंट स्कीम, दिया हर सवाल का जवाब
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

