सुप्रीम कोर्ट
Cyber Crime Law India: साइबर अपराधियों के खिलाफ निवारक निरोध कानूनों के उपयोग करने की तमिलनाडु सरकार की सराहना की है. जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि जब नियमित आपराधिक कानून कम पड़ जाते है तो तमिलनाडु सरकार का यह कदम सराहनीय है.
कोर्ट ने कहा कि यह राज्य सरकार से आने वाला एक अच्छा संकेत है कि साइबर कानून अपराधियों के खिलाफ निवारक निरोध कानूनों का इस्तेमाल किया जा रहा है. यह एक बहुत ही स्वागत योग्य दृष्टिकोण है. सामान्य आपराधिक कानून इन अपराधियों के खिलाफ सफल साबित नहीं हो रहे हैं.
राज्य सरकार ने दायर किया जवाबी हलफनामा
मामले की सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में एक जवाबी हलफनामा दायर किया गया है. जिसके बाद कोर्ट ने रजिस्ट्री को राज्य सरकार के जवाब को रिकॉर्ड पर लाने और सॉफ्ट कॉपी अपलोड करने का निर्देश दिया है. कोर्ट 25 जून को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.
कोर्ट ने कहा कि सामान्य आपराधिक कानून इन अपराधियों के खिलाफ सफल साबित नहीं हो रहे हैं. कोर्ट साइबर अपराध के आरोपी अभिजीत सिंह के पिता द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था. दायर याचिका में मद्रास हाईकोर्ट तमिलनाडु सरकार के फैसले को बरकरार रखने के खिलाफ अपील दायर की गई है. याचिका में हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उनकी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज कर दी गई थी.
याचिका में निरोध को बताया गया असंवैधानिक
बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में दावा किया गया था कि निरोध असंवैधानिक था और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22(5) के साथ-साथ तमिलनाडु खतरनाक गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम 1982 के तहत प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं का उल्लंघन करता था.
अभिजीत सिंह को 25 जुलाई 2024 को थेनी साइबर अपराध पुलिस स्टेशन में भानुमति नामक व्यक्ति की शिकायत पर गिरफ्तार किया गया था. यह घोखाधड़ी 84.5 लाख की थी, जिसमें से 12 लाख से अधिक रुपये कथित तौर पर मेसर्स क्रिएटिव क्राफ्ट नामक खाते में ट्रांसफर किया गया था.
ये भी पढ़ें: वजाहत खान की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, 6 राज्यों में दर्ज हैं धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोप
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



