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सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में धमकी की शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने पर उठाए सवाल

Lakhimpur Kheri Violence Case: सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी हिंसा केस में गवाह को धमकी देने की शिकायत पर एफआईआर दर्ज न होने और कोई कार्रवाई न होने पर यूपी पुलिस पर सवाल उठाए. कोर्ट ने निचली अदालत को अधिकतम गवाहों से पूछताछ करने का निर्देश दिया.

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Lakhimpur Kheri Violence Case: सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की सुनवाई के दौरान धमकी की शिकायत पर कार्रवाई न करने पर सवाल उठाए है. जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने निचली अदालत में 20 अगस्त को होने वाली सुनवाई में अधिक से अधिक गवाहों से पूछताछ करने का निर्देश दिया है.

मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा कि 20 गवाहों से पूछताछ की गई है, जबकि अभियोजन पक्ष ने 20 गवाहों को हटा दिया है. वही शिकायतकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि धमकी मिलने की शिकायत करने के बावजूद आज तक न तो कोई कार्रवाई हुई और ना ही एफआईआर दर्ज किया गया.

जबकि ललिता कुमारी मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि शिकायत मिलने के एक सप्ताह के भीतर एफआईआर दर्ज होने चाहिए. लेकिन डेढ़ महीने बाद भी एफआईआर दर्ज नही हुआ है. जिसपर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि एसपी ने शिकायतकर्ता को फोन किया था. लेकिन उन्होंने फोन नही उठाया. उसके मुताबिक वो अपनी पहचान उजागर नही करना चाहता है.

सुप्रीम कोर्ट की सख्त शर्तें – यूपी और NCR में रहने पर रोक

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने आशीष मिश्रा की ओर से पेश वकील से कहा था कि जमानत शर्तो का सख्ती से पालन करना होगा. वही पीड़ितों की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने 22 जुलाई को मिश्रा को जमानत दी थी. साथ ही जमानत की शर्तों का पालन करने का निर्देश दिया था और उन्हें तय तारीख से केवल एक दिन पहले अपने मुकदमे के स्थान पर जाने की अनुमति दी थी. लेकिन वह एक अक्टूबर को (लखीमपुर खीरी) ऐसे गए जैसे दो अक्टूबर को राष्ट्रीय अवकाश वाले दिन सुनवाई हो. जबकि अगले दिन अदालत बंद थी और उन्होंने एक अक्टूबर को एक विशाल सार्वजनिक रैली को संबोधित किया.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते समय आशीष मिश्रा पर कई शर्ते लगा रखा है. आशीष मिश्रा को रिहाई से एक सप्ताह के भीतर उत्तर प्रदेश छोड़ना होगा. वह यूपी, दिल्ली या दिल्ली एनसीआर में नही रह सकते है. उन्हें अदालत को अपने स्थान के बारे में सूचित करना होगा, कोर्ट ने पासपोर्ट सरेंडर करने, गवाहों को प्रभावित ना करने और सबूतों के साथ छेड़छाड़ नही करने का आदेश दिया था.

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-भारत एक्सप्रेस 



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