टेलीकॉम कंपनियों वोडाफोन, आइडिया, एयरटेल, टाटा टेलीसर्विसेज एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एडीआर) की बकाया माफ करने की मांग को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया है.
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने एजीआर से जुड़ी याचिकाओं को गलत धारणा वाला बताया है. वोडाफोन आइडिया ने दावा किया था कि अगर उसे राहत नहीं मिली तो वह मार्च 2026 के आगे काम जारी नहीं रख पाएगी. वोडाफोन, आइडिया लंबे समय से वित्तीय संकट से जूझ रही है. कंपनी ने अपने अस्तित्व को बचाने के लिए एजीआर से जुड़े 45000 करोड़ रुपये से ज्यादा के बकाए को माफ करने की गुहार लगाई थी.
भारती एयरटेल ने भी इसी तरह की अर्जी लगाकर राहत मांगी थी. वोडाफोन आइडिया ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर लगभग 30000 करोड़ रुपए के जुर्माने और उस पर लगे ब्याज से राहत की मांग की थी. कंपनी ने तर्क दिया था कि अगर सरकार से तुरंत सहायता नहीं मिली तो पूरा टेलीकॉम सेक्टर खतरे में पड़ जाएगा.
कोर्ट के फैसले के बाद वोडाफोन आइडिया के शेयर 7.19 रुपए के लेवल पर ओपन हुए थे, जबकि दोपहर 1:36 बजे 11.67 प्रतिशत की भारी गिरावट के बाद 6.51 के भाव पर कारोबार कर रहे थे, जबकि इसका 52 सप्ताह का नियुन्तम स्तर 6.47 रुपये है. पिछले एक महीने के दौरान इसने करीब 20 फीसदी की गिरावट दर्ज की है, जबकि 6 महीने की अवधि में 6.5 फीसदी का नुकसान हुआ है.
याचिका में भारती एयरटेल और भारती हेक्साकॉम पर 9235 करोड़ की मूल एजीआर राशि बकाया है. हालांकि ब्याज (21850 करोड़ रुपए), जुर्माना (3995 करोड़ रुपए) और जुर्माने पर ब्याज (8900 करोड़ रुपए) जोड़ने का कुल देनदारी 43980 करोड़ रुपए हो जाती है.
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