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बलजीत यादव को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, PMLA की शर्तों पर नाकाम रहे पूर्व विधायक

सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राजस्थान के बहरोड़ के पूर्व विधायक बलजीत यादव को राहत देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी है.

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मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में आरोपी और राजस्थान के बहरोड़ से पूर्व निर्दलीय विधायक बलजीत यादव को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की खंडपीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है, जिसमें उन्हें जमानत देने से मना कर दिया गया था. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पूरी तरह बरकरार रखा है.

वकीलों की दलीलें और ईडी का पक्ष

सुनवाई के दौरान पूर्व विधायक बलजीत यादव की पैरवी करते हुए वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने दलील दी कि प्रॉसिक्यूशन (अभियोजन) की शिकायत पर अभी तक संज्ञान नहीं लिया गया है, और कमियों को दूर करने के लिए मामला बार-बार तारीखें मिलने के बावजूद लंबित पड़ा है. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि प्रॉसिक्यूशन कार्यवाही को आगे बढ़ाने में हुई देरी का कोई संतोषजनक कारण नहीं दे पाया है.

दूसरी ओर, प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पेश वकील जोहेब हुसैन ने बलजीत यादव की जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया और अदालत से इसे खारिज करने की मांग की. ईडी के वकील ने कोर्ट को बताया कि आरोपी बलजीत यादव प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत जमानत मिलने के लिए आवश्यक दो अनिवार्य शर्तों को पूरा करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं.

क्या है पूरा मामला?

ईडी की छापेमारी: प्रवर्तन निदेशालय ने गत वर्ष 24 जनवरी को जयपुर, दौसा और बहरोड़ में बलजीत यादव से जुड़े लगभग 10 ठिकानों पर व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया था.

फंड का दुरुपयोग: तथ्यों के अनुसार, वर्ष 2021-22 के दौरान बहरोड़ विधानसभा क्षेत्र के 32 सरकारी स्कूलों के लिए बैडमिंटन और क्रिकेट किट की खरीद की गई थी. आरोप है कि खेल किट की खरीद के नाम पर विधायक कोष (MLA Fund) से करीब ₹3.72 करोड़ (कुछ रिपोर्ट्स में ₹3 करोड़) खर्च किए गए, जिसमें भारी पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं और राशि का दुरुपयोग किया गया.

ACB और ED की कार्रवाई: इस मामले में सबसे पहले एसीबी (Anti-Corruption Bureau) ने एफआईआर दर्ज की थी, और इसी के आधार पर बाद में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अपनी जांच शुरू की और पूर्व विधायक को गिरफ्तार किया था.



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