Bharat Express DD Free Dish

‘सोनम वांगचुक पूरी तरह से ठीक, सर्वोत्तम उपचार मिल रहा’, केंद्र की जानकारी पर क्यों बिफर गए सुप्रीम कोर्ट के जज?

सुप्रीम कोर्ट ने सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी से जुड़ी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर केंद्र सरकार को 10 फरवरी को पेश होने का निर्देश दिया. कोर्ट ने साफ कहा कि हैबियस कॉर्पस मामलों में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

Edited by Rohit Agrawal

Sonam Wangchuk habeas corpus case Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने लद्दाख के पर्यावरण और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी और हिरासत से जुड़े मामले में केंद्र सरकार की टालमटोल रणनीति को सिरे से खारिज कर दिया है. कोर्ट ने 10 फरवरी 2026 को सुनवाई तय की है और सरकार को साफ कहा है कि हैबियस कॉर्पस यानी बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) से जुड़े मामलों में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. वहीं मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज की सुनवाई टालने की मांग को ठुकरा दिया.

कोर्ट ने क्या कहा?

जब एएसजी ने सुनवाई को अगले हफ्ते टालने की मांग की, तो जस्टिस अरविंद कुमार ने तुरंत सवाल किया कि अब तक क्या प्रोग्रेस हुई है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सोनम वांगचुक की सेहत को देखते हुए उनकी हिरासत पर दोबारा विचार करने का सुझाव दिया था. केंद्र ने कोर्ट को बताया कि वांगचुक को बेहतर इलाज दिया जा रहा है.

जस्टिस पी बी वराले ने कहा कि सेहत से जुड़े मुद्दे साफ तौर पर सामने हैं और सरकार भी इन्हें नकार नहीं रही है. कोर्ट ने केंद्र की इस दलील पर नाराजगी जताई कि जयपुर या एम्स में इलाज लद्दाख की तुलना में बेहतर है. कोर्ट ने कहा कि यह तर्क उचित नहीं है. सरकार की ओर से दावा किया गया कि एम्स में इलाज इसलिए कराया जा रहा है क्योंकि लद्दाख में पर्याप्त मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. इसको लेकर कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि यह हैबियस कॉर्पस का मामला है और इसमें किसी भी तरह की देरी स्वीकार नहीं की जा सकती. केंद्र सरकार को 10 फरवरी को हर हाल में पेश होने का निर्देश दिया गया है.

पिछली सुनवाई में केंद्र का दावा

पिछली सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल मेहता ने दावा किया था कि सोनम वांगचुक Gen Z यानी युवा पीढ़ी को उकसा कर लद्दाख में नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसी अस्थिरता पैदा करना चाहते थे. उन्होंने कहा था कि वांगचुक अहिंसा का केवल दिखावा करते हैं. उनके भाषणों की शुरुआत और अंत में महात्मा गांधी का नाम होता है, लेकिन बीच में भड़काऊ बातें होती हैं.

वहीं मेहता ने यह भी कहा कि वांगचुक के भाषण साधारण विरोध नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं. इसी आधार पर 26 सितंबर 2025 को उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून NSA के तहत गिरफ्तार कर जोधपुर जेल भेजा गया था.

सोनम वांगचुक की पत्नी की याचिका

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है. इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर अपने पति की बिना शर्त रिहाई की मांग की है. पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रपति एक आदिवासी होने के नाते लद्दाख के लोगों की भावनाओं को समझें. चार साल से जनता के हितों के लिए काम करने पर वांगचुक की जासूसी कराई गई और उनकी गिरफ्तारी पूरी तरह गैरकानूनी है.

जानिए क्या है पूरा मामला?

सोनम वांगचुक लद्दाख में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और स्थानीय लोगों के अधिकारों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं. उनकी गिरफ्तारी और हिरासत को लेकर देशभर में बहस छिड़ी हुई है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सेहत और हिरासत दोनों पहलुओं पर गंभीरता दिखाई है.

बता दें कि 10 फरवरी को होने वाली सुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है, जिसमें बड़ा फैसला आने की संभावना है. यह मामला सिर्फ सोनम वांगचुक की रिहाई तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण कार्यकर्ताओं के अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से भी सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है. कोर्ट का सख्त रुख केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाता नजर आ रहा है.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read