Bharat Express DD Free Dish
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital

सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे लोगों को मंत्री बनाने के संबंध में दिशा निर्देश जारी करने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज किया।

Ministers Guidelines: सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे नेताओं को मंत्री बनाने और महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंपने के लिए गाइडलाइन जारी करने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी है. याचिका में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को मंत्रियों के चयन के दौरान आपराधिक रिकॉर्ड, आरोपों की गंभीरता और संवैधानिक नैतिकता का ध्यान रखने का निर्देश देने की मांग की गई थी.

Ministers Guidelines

Ministers Guidelines

Edited by Swati Pandey

Ministers Guidelines: सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे नेताओं को मंत्री बनाए जाने और उन्हें महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंपने के संबंध में दिशा-निर्देश जारी करने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी है. याचिका में मांग की गई थी कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री मंत्रियों की नियुक्ति करते समय उनके आपराधिक रिकॉर्ड और आरोपों की गंभीरता को ध्यान में रखें. साथ ही, महत्वपूर्ण कैबिनेट विभागों का बंटवारा करते समय भी पारदर्शी और उचित मानकों का पालन किया जाए. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दिया.

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों के लिए मांगे गए थे दिशा-निर्देश

जनहित याचिका में मांग की गई थी कि प्रधानमंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्रियों को निर्देश दिया जाए कि किसी विधायक को मंत्री नियुक्त करते समय उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों और आरोपों की गंभीरता पर विचार किया जाए. याचिका में यह भी कहा गया था कि गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे नेताओं को महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी देने के मामले में कुछ स्पष्ट मानक तय होने चाहिए. इससे सार्वजनिक जीवन में नैतिकता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी.

मंत्री बनने के लिए नई अयोग्यता तय करना उद्देश्य नहीं: याचिकाकर्ता

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि इस याचिका का मकसद संविधान के अनुच्छेद 75 और अनुच्छेद 164 के तहत मंत्रियों की नियुक्ति के लिए कोई नई कानूनी अयोग्यता तय करना नहीं है. याचिका में स्पष्ट किया गया कि आपराधिक आरोपों का सामना कर रहा व्यक्ति केवल इस आधार पर मंत्री बनने के लिए कानूनी रूप से अयोग्य नहीं हो जाता. हालांकि, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को मंत्रियों का चयन करते समय अपने संवैधानिक विवेक का इस्तेमाल उचित और पारदर्शी मानकों के आधार पर करना चाहिए.

संवैधानिक नैतिकता की अवधारणा पर आधारित है पूरा तर्क

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता का पूरा तर्क संवैधानिक नैतिकता की अवधारणा पर आधारित है. याचिका में दलील दी गई थी कि मंत्रियों की नियुक्ति और उन्हें महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपते समय केवल कानूनी पात्रता ही नहीं, बल्कि संवैधानिक पदों की गरिमा, सार्वजनिक विश्वास और नैतिक मूल्यों को भी महत्व दिया जाना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर विचार करने से किया इनकार

याचिका में गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे नेताओं को मंत्री बनाने और महत्वपूर्ण कैबिनेट विभाग सौंपने के लिए दिशा-निर्देश तय करने की मांग की गई थी. हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के बाद जनहित याचिका खारिज कर दी.
इस फैसले के साथ ही मंत्रियों की नियुक्ति और मंत्रालयों के आवंटन में आपराधिक आरोपों तथा नैतिक मानकों को लेकर दिशा-निर्देश जारी करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप नहीं किया.

भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital