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पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा; असम सरकार ने किया कड़ा विरोध

सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है. असम सरकार ने खेड़ा पर जालसाजी और जांच में असहयोग के आरोप लगाए हैं.

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सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदूरकर की पीठ ने सभी पक्षों की जिरह के बाद यह निर्णय लिया. खेड़ा ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ अपील दायर की है, जिसमें उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी.

असम सरकार और एसजी तुषार मेहता की दलीलें

मामले की सुनवाई के दौरान असम सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत का कड़ा विरोध किया. एसजी मेहता ने कहा कि “बंटी-बबली गायब होने वाले हैं” जैसे बयान छवि धूमिल करने वाले हैं. इसके अलावा दस्तावेजों को फोर्ज (जालसाजी) करके दिखाया गया है, जो एक आपराधिक कृत्य है. एसजी ने कहा कि खेड़ा जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और फरार हैं. उन्होंने यह भी बताया कि खेड़ा वीडियो जारी कर कह रहे हैं कि वह एक राज्य की पुलिस से बचकर सुरक्षित स्थान पर हैं. एसजी ने सवाल उठाया कि तेलंगाना हाई कोर्ट ने उस मामले में जमानत क्यों दी जिसका अपराध और पंजीकरण असम में हुआ था.

अभिषेक मनु सिंघवी का पक्ष

खेड़ा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे एक अभूतपूर्व मामला बताया. उन्होंने कहा कि मेरी गिरफ्तारी की आशंका को अभियोजक ने स्वयं पुष्ट कर दिया है. सिंघवी ने संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की भाषा पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने का आरोप मुख्य है, लेकिन इसके लिए जिस तरह से पुलिस बल का प्रयोग किया जा रहा है वह अनुचित है. उन्होंने आरोप लगाया कि निजामुद्दीन में पुलिस इस तरह पहुँची जैसे किसी आतंकवादी की तलाश की जा रही हो.

गुवाहाटी हाई कोर्ट का पिछला फैसला

इससे पहले गुवाहाटी हाई कोर्ट ने पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि पहली नजर में यह मामला सिर्फ मानहानि का नहीं, बल्कि फर्जी दस्तावेज रखने से जुड़ा गंभीर मामला लगता है. कोर्ट ने माना कि खेड़ा जांच से बचने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए पुलिस को उनका कस्टोडियल इंट्रोगेशन (हिरासत में पूछताछ) करना जरूरी है.

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मामले की पृष्ठभूमि: हिमंता बिस्वा सरमा के परिवार पर आरोप

यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा के खिलाफ कथित तौर पर मानहानिकारक और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाने के लिए दर्ज किया गया था. पवन खेड़ा ने दावा किया था कि रिंकी भुइयां के पास कई विदेशी पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्तियां हैं. असम पुलिस ने उनके खिलाफ मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश के तहत केस दर्ज किया है. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि कांग्रेस ने दस्तावेजों की सत्यता की जांच नहीं की और पुलिस आरोपी को ढूंढ निकालेगी.



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