Bharat Express DD Free Dish

पंजाब के पूर्व मंत्री संजीव अरोड़ा की अंतरिम जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एससी शर्मा और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बंद पंजाब के पूर्व मंत्री संजीव अरोड़ा की मेडिकल ग्राउंड पर अंतरिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है.

Sanjeev Arora

प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर मामले में जेल में बंद पंजाब सरकार के पूर्व मंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता संजीव अरोड़ा की अंतरिम जमानत याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. जस्टिस एससी शर्मा और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की दो सदस्यीय विशेष खंडपीठ ने याचिकाकर्ता संजीव अरोड़ा और प्रवर्तन निदेशालय (ED) दोनों पक्षों के वकीलों की लंबी और तीखी जिरह सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रखने का आदेश दिया. संजीव अरोड़ा ने गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए चिकित्सीय आधार (मेडिकल ग्राउंड) पर सुप्रीम कोर्ट से तत्काल अंतरिम जमानत दिए जाने की गुहार लगाई है.

पिछली सुनवाई के दौरान पीठ ने एम्स (AIIMS) से मेडिकल रिपोर्ट न आने पर असंतोष जताया था. कोर्ट ने सवाल किया था, “पिछली बार हमने एम्स के मेडिकल बोर्ड से आरोपी की विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी थी; वह रिपोर्ट कहाँ है? हमने इसके लिए पर्याप्त समय भी दिया था.”

इस पर संजीव अरोड़ा की ओर से पेश हुए देश के वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने अदालत को आश्वस्त करते हुए कहा था कि एम्स द्वारा तैयार गोपनीय रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में दाखिल की जाएगी. इस पर बेंच ने टिप्पणी की थी कि रिपोर्ट फिलहाल जजों के बेंच तक नहीं पहुँची है. गौरतलब है कि पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट से नियमित जमानत याचिका खारिज होने के बाद संजीव अरोड़ा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

103 करोड़ की हेराफेरी का दावा

प्रवर्तन निदेशालय ने हाल ही में इस हाई-प्रोफाइल केस में विशेष पीएमएलए (PMLA) कोर्ट के समक्ष 30,000 से अधिक पन्नों की एक बेहद विशाल और विस्तृत चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल की है. अदालत में दायर इस चार्जशीट में जांच एजेंसी ईडी ने आधिकारिक दावा किया है कि संजीव अरोड़ा और उनके सहयोगियों द्वारा इस पूरे आर्थिक अपराध के जरिए कुल 103 करोड़ रुपए की भारी वित्तीय हेराफेरी (मनी लॉन्ड्रिंग) की गई है.

‘कागजों पर दुबई भेजे गए 44 हजार आईफोन’

जांच एजेंसी की विस्तृत छानबीन में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि आरोपी संजीव अरोड़ा ने कागजों में दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार लगभग 44,000 महंगे आईफोन (iPhones) का निर्यात (एक्सपोर्ट) संयुक्त अरब अमीरात (दुबई) में कभी किया ही नहीं.

ईडी का आरोप है कि यह पूरी व्यापक व्यापारिक प्रक्रिया केवल कागजों और फाइलों तक ही सीमित रखी गई. इस फर्जी कारोबार को सच साबित करने के लिए कथित तौर पर फर्जी खरीद बिल (इनवॉइस) और शिपिंग से जुड़े जाली दस्तावेज तैयार किए गए. ईडी ने दावा किया है कि इस फर्जीवाड़े के जरिए सरकार से मिलने वाले निर्यात वित्तीय लाभ हासिल करने और अवैध धन (ब्लैक मनी) के वास्तविक स्रोत को छुपाने की सोची-समझी साजिश रची गई. एजेंसी के अनुसार, कागजों पर आईफोन बिक्री का यह पूरा फर्जी कारोबार ₹150 करोड़ से भी अधिक का दिखाया गया था.

फेमा और हैम्पटन स्काई रियल्टी से जुड़े हैं तार

मामले की क्रोनोलॉजी के अनुसार, ईडी ने संजीव अरोड़ा को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत 9 मई को गिरफ्तार किया था. इससे पहले ईडी ने संजीव अरोड़ा और उनसे जुड़ी कंपनियों के परिसरों पर ‘विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम’ (FEMA) के तहत बड़े पैमाने पर छापेमारी की थी.

ये भी पढ़ें: फिर कांपा जापान: 7.1 तीव्रता का भूकंप, सुनामी की चेतावनी जारी

उसी प्राथमिक जांच के दौरान विदेशी लेनदेन और फॉरेन एक्सचेंज में गंभीर गड़बड़ियों के पुख्ता संकेत मिले थे, जिसके आधार पर इस मनी लॉन्ड्रिंग केस को आगे बढ़ाते हुए छापेमारी की गई. इसी कड़ी में ईडी की टीमों ने ‘मेसर्स हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड’ (Hampton Sky Realty Limited) के कॉरपोरेट दफ्तरों और संजीव अरोड़ा के निजी व व्यावसायिक परिसरों समेत कुल पांच ठिकानों पर एक साथ सर्च ऑपरेशन चलाया था. अब सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.
    Tags:

Also Read