सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लेते हुए एक बेहद अहम और कड़ा आदेश जारी किया है. अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि “महत्वपूर्ण यह है कि अपराध को रोका जाए, न कि अपराध हो जाने के बाद आप क्या करते हैं. असामाजिक तत्वों के मन में ऐसा खौफ होना चाहिए कि वे कुछ भी गलत करने से पहले कांप उठें.”
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल वारदात के बाद कानूनी कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपराध को रोकने के लिए पुलिस की जमीनी स्तर पर लगातार मौजूदगी, पेट्रोलिंग और कड़ी निगरानी बेहद जरूरी है.
हालिया घटनाओं पर कोर्ट की चिंता
अदालत ने अपने स्वतः संज्ञान आदेश में हाल ही की तीन गंभीर घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि ये कानून-व्यवस्था को आईना दिखाने वाली हैं:
- ग्रेटर नोएडा से दिल्ली आ रही चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म की घटना.
- कालकाजी मंदिर के पास आस्था कुंज पार्क में हुई दरिंदगी.
- फरीदाबाद की एक खंडहर इमारत में हुई आपराधिक वारदात.
सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए प्रमुख निर्देश
स्कूल, कॉलेज और कोचिंग सेंटरों के पास गश्त: कोर्ट ने दिल्ली के सभी स्कूलों, कॉलेजों, यूनिवर्सिटी और कोचिंग संस्थानों के आसपास पुलिस की गश्त और निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया है. पुलिस को ऐसे संवेदनशील इलाकों की पहचान कर वहां नियमित और अचानक (Random) जांच करने को कहा गया है, जहां अपराध का खतरा अधिक होता है.
सार्वजनिक स्थानों की कमियों को दूर करना: अदालत ने कहा कि बिना निगरानी वाले अंधेरे इलाके, खराब स्ट्रीट लाइट, अवैध शराब की दुकानें और खाने-पीने के अनधिकृत ठिकाने महिलाओं की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा करते हैं. इसलिए सार्वजनिक स्थानों का बेहतर रखरखाव और नियमित पेट्रोलिंग जरूरी है.
वाहन चालकों की सख्त जांच: महिलाओं की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए बस, कैब, टैक्सी और ऑटो चालकों के सत्यापन (Verification) के कड़े निर्देश दिए गए हैं. यह नियम ओला, उबर और रैपिडो जैसी ऐप-आधारित टैक्सी सेवाओं पर भी सख्ती से लागू होगा.
- अब केवल पूरी जांच और रिकॉर्ड के बाद ही ड्राइवर वाहन चला सकेंगे.
- वाहन के अंदर ड्राइवर और सहायक (Helper) का नाम व फोटो साफ तौर पर प्रदर्शित होना चाहिए.
- ड्राइवरों के लिए यूनिफॉर्म या ऐसा पहचान पत्र रखना अनिवार्य होगा, जिससे यात्री उन्हें आसानी से पहचान सकें.
- नियम तोड़ने पर सीधे वाहन जब्त करने और ड्राइवर को निलंबित करने जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी.
कंट्रोल रूम और रियल-टाइम एक्शन प्रोटोकॉल
दिल्ली पुलिस प्रमुख और मुख्य सचिव को एक संयुक्त रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है. इस रिपोर्ट में यह बताना होगा कि कंट्रोल रूम, कमांड सेंटर या वॉर रूम की व्यवस्था क्या है, उसका दायरा कितना है और किसी भी आपात स्थिति में ‘रियल-टाइम’ कार्रवाई के लिए क्या प्रोटोकॉल लागू है.
ये भी पढ़ें: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा के लिए नो-वोटिंग: BJP की किस पांसे से बैकफुट पर गए अखिलेश यादव?
SOS अलर्ट और व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम
कोर्ट ने अधिकारियों को SOS अलर्ट के लिए एक स्पष्ट रिस्पॉन्स प्रोटोकॉल तैयार करने को कहा है, जिसमें संबंधित यूनिट, अलर्ट मिलने के बाद की गई कार्रवाई और रिस्पॉन्स में लगने वाले समय का पूरा रिकॉर्ड रखा जाए. इसके साथ ही, पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ‘व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम’ की व्यवस्था का मूल्यांकन करने का भी निर्देश दिया गया है.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


