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फिल्म उदयपुर फाइल्स पर लगी रोक के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनवाई को तैयार

उदयपुर में कन्हैया लाल की हत्या पर आधारित फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ की रिलीज़ पर दिल्ली हाई कोर्ट की रोक के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनवाई करेगा. फिल्म निर्माता अमित जानी ने रोक हटाने की मांग की है.

Udaipur Files Film
Edited by Akansha

राजस्थान के उदयपुर में दर्जी कन्हैया लाल की हत्या पर आधारित फिल्म उदयपुर फाइल्स पर लगी रोक के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनवाई को तैयार हो गया है. यह याचिका फिल्म निर्माता अमित जानी ने दायर की है. अमित जानी ने दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा फिल्म रिलीज पर लगी रोक को हटाने की मांग की है.

याचिकककर्ता कि ओर से जल्द सुनवाई की मांग की

याचिकककर्ता कि ओर से पेश बीजेपी नेता गौरव भाटिया ने जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष मेंशन कर जल्द सुनवाई की मांग की. कोर्ट ने मामले को एक या दो दिन में सूचीबद्ध करने का भरोसा दिया है. भाटिया ने कहा कि सीबीएफसी ने पहले ही उक्त फिल्म को मंजूरी दे दी है और इसे रिलीज़ न करना उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है.

उदयपुर फाइल्स को लेकर कोर्ट में याचिका दायर कर की गई थी मांग

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर मांग की गई थी कि फिल्म उदयपुर फाइल्स को कांवड़ यात्रा खत्म होने तक रिलीज न करें जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली हाई कोर्ट पहले ही फिल्म की रिलीज पर रोक लगा चुका है. दिल्ली हाई कोर्ट ने 10 जुलाई को फिल्म की रिलीज पर रोक लगा दिया था.

हाई कोर्ट ने कही ये बात

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) द्वारा फिल्म को दिए गए प्रमाणन के खिलाफ जमीयत उलेमा-ए-हिंद की तरफ से दायर पुनरीक्षण आवेदन पर केंद्र सरकार द्वारा अंतरिम राहत पर निर्णय लेने तक फिल्म रिलीज पर रोक जारी रहेगी. मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था कि इस फिल्म की रिलीज के बाद उनके केस की निष्पक्ष सुनवाई की संभावना खतरे में पड़ सकती है. इस मामले में कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ताओं ने केंद्र से मिलने वाले उपायों का इस्तेमाल नहीं किया है.

फिल्म के लगभग हर दृश्य में उस समुदाय को गलत तरीके से दर्शाया गया

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि फिल्म के लगभग हर दृश्य में उस समुदाय को गलत तरीके से दर्शाया गया है, जिससे सामाजिक सौहार्द और सार्वजनिक व्यवस्था को गंभीर खतरा है. सिब्बल ने यह भी कहा था कि फिल्म को दिया गया प्रमाण पत्र न केवल अधिनियम की धारा 5 बी के खिलाफ है, जो ऐसे किसी भी कंटेंट के प्रमाणन पर रोक लगाता है जो अपराध को उकसाने या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरे में डालने की संभावना रखता हो, बल्कि यह 1991 कि केंद्र सरकार की अधिसूचना का उल्लंघन है.

-भारत एक्सप्रेस 



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