उत्तर प्रदेश के संभल स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद विवाद को लेकर दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट अब आगामी 21 जुलाई 2026 को सुनवाई करेगा. माननीय जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई को फिलहाल आगे के लिए टाल दिया है.
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने जताया था आश्चर्य
इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह पूरा मामला अंतरिम आदेश के खिलाफ है और शीर्ष अदालत जल्द ही इस मामले का अंतिम निपटारा करेगी. सुनवाई के दौरान पीठ ने इस बात पर गहरा आश्चर्य व्यक्त किया था कि एक ही निचली अदालत के आदेश के खिलाफ दो अलग-अलग स्व-याचिकाएं (सेल्फ-पिटीशंस) कैसे दाखिल की जा सकती हैं? गौरतलब है कि इन याचिकाओं के माध्यम से संभल मस्जिद परिसर के वैज्ञानिक सर्वे के लिए एडवोकेट कमिश्नर (अधिवक्ता आयुक्त) की नियुक्ति करने के निचली अदालत के फैसले को सीधी चुनौती दी गई है.
कानून-व्यवस्था दुरुस्त करने की हिदायत
सुप्रीम कोर्ट ने संभल हिंसा और विवाद को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पूर्व में ही स्थानीय चंदौसी निचली अदालत की आगे की सभी कार्यवाहियों पर पूरी तरह रोक लगा दी थी. इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने कड़ा निर्देश दिया था कि एडवोकेट कमिश्नर द्वारा तैयार की गई मस्जिद परिसर की सर्वे रिपोर्ट पूरी तरह से सीलबंद (सीलपैक) लिफाफे में ही सुरक्षित रखी जाएगी और उसे फिलहाल किसी भी परिस्थिति में नहीं खोला जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश शासन और स्थानीय प्रशासन को जिले में कानून-व्यवस्था की स्थिति को पूरी तरह दुरुस्त और शांतिपूर्ण बनाए रखने की सख्त हिदायत भी दी थी.
रिटायर्ड जज डीके अरोड़ा करेंगे अध्यक्षता
संभल में 24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद के दूसरे दौर के सर्वे के दौरान भड़की भीषण हिंसा की निष्पक्ष जांच के लिए उत्तर प्रदेश राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग (Judicial Inquiry Commission) का गठन किया है. इलाहाबाद हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश देवेंद्र कुमार अरोड़ा (डी. के. अरोड़ा) की अध्यक्षता में गठित यह आयोग दो महीने के भीतर अपनी विस्तृत जांच पूरी कर रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा. इस न्यायिक आयोग में उत्तर प्रदेश के सेवानिवृत्त आईएएस (IAS) अधिकारी अमित मोहन प्रसाद व सेवानिवृत्त आईपीएस (IPS) अधिकारी अरविंद कुमार जैन को बतौर सदस्य शामिल किया गया है.
2 दिन के सर्वे के बाद रिपोर्ट तैयार
विवाद की टाइमलाइन के अनुसार, एडवोकेट कमिश्नर की टीम द्वारा दो दिन तक किए गए सघन सर्वे के बाद आधिकारिक रिपोर्ट पूरी तरह तैयार कर ली गई है. चंदौसी की निचली अदालत ने यह रिपोर्ट पेश करने के लिए कमेटी को 29 नवंबर 2024 तक का समय दिया था.
सर्वोच्च न्यायालय ने निचली अदालत को यह भी निर्देश दिया था कि सर्वेक्षण आदेश के खिलाफ मस्जिद इंतजामिया कमेटी द्वारा दायर मुख्य याचिका जब तक इलाहाबाद हाई कोर्ट में विधिवत सूचीबद्ध (लिस्टेड) होकर सुनवाई के लिए नहीं आ जाती, तब तक निचली अदालत इस मामले की समानांतर सुनवाई न करे.
हिंसा में हुई थी 4 की मौत
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब हिंदू पक्ष की ओर से संभल की ऐतिहासिक शाही जामा मस्जिद परिसर में प्राचीन ‘श्री हरिहर मंदिर’ होने का दावा ठोकते हुए सिविल कोर्ट में एक दीवानी याचिका दाखिल की गई थी. इस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए 19 नवंबर 2024 को निचली अदालत ने तत्काल मस्जिद परिसर के वीडियो राडार और भौतिक सर्वेक्षण (सर्वे) के आदेश जारी कर दिए थे.
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इस आदेश के तुरंत बाद संभल में सांप्रदायिक तनाव अत्यधिक बढ़ गया था. 24 नवंबर को जब टीम दोबारा सर्वे करने पहुंची, तो कोर्ट के इस सर्वेक्षण आदेश का विरोध करने वाले प्रदर्शनकारियों और मुस्तैद पुलिस बल के बीच बेहद हिंसक झड़प व पथराव हुआ. इस भीषण हिंसा और गोलीबारी की चपेट में आने से कुल चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी.
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