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पटियाला हाउस कोर्ट ने सुशील अंसल पर तय किए आरोप, पासपोर्ट नवीनीकरण में झूठे घोषणापत्र का मामला

Uphaar Cinema Fire Case: पटियाला हाउस कोर्ट ने उपहार अग्निकांड के दोषी सुशील अंसल पर पासपोर्ट नवीनीकरण में आपराधिक मामले छिपाने के आरोप तय किए हैं. कोर्ट ने IPC 420 और पासपोर्ट एक्ट के तहत 25 अप्रैल से ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया.

Edited by Rohit Agrawal

Uphaar Cinema Fire Case: पटियाला हाउस कोर्ट ने उपहार सिनेमा अग्निकांड के दोषी सुशील अंसल के खिलाफ पासपोर्ट नवीनीकरण के दौरान आपराधिक मामलों को छिपाने और झूठे घोषणापत्र दाखिल करने के मामले में आरोप तय कर दिए हैं. बताया दें कि चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट श्रेया अग्रवाल ने यह आदेश दिया. मामले की सुनवाई के दौरान सुशील अंसल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए और लगाए गए सभी आरोपों से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने अब इस मामले में 25 अप्रैल से ट्रायल शुरू करने का फैसला किया है.

कोर्ट ने क्या फैसला दिया?

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पहली नजर में सुशील अंसल ने अपने ऊपर चल रहे आपराधिक मामलों से संबंधित जानकारी को जानबूझकर छिपाया है. अदालत ने यह भी माना कि आरोपित ने गलत या अधूरी जानकारी के आधार पर पासपोर्ट प्राधिकारियों को गुमराह किया. इससे उन्होंने पासपोर्ट रिन्यूअल कराकर गलत फायदा उठाया. कोर्ट ने इसे भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और पासपोर्ट एक्ट की धारा 12 के तहत दंडनीय अपराध माना है.

मामला कैसे शुरू हुआ?

यह मामला 2018 में दिल्ली हाई कोर्ट के एक आदेश से शुरू हुआ था. उपहार अग्निकांड पीड़ितों के संगठन एवीयूटी की याचिका पर हाई कोर्ट ने सुशील अंसल द्वारा वर्षों तक गलत जानकारी के आधार पर पासपोर्ट हासिल करने के आरोपों की जांच के निर्देश दिए थे. इसके बाद 2019 में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने सुशील अंसल के खिलाफ केस दर्ज किया. आरोप था कि उन्होंने पासपोर्ट आवेदन में 1997 के उपहार सिनेमा अग्निकांड में अपनी दोषसिद्धि का जिक्र नहीं किया. यह जानकारी छिपाने से पासपोर्ट रिन्यूअल संभव हो सका.

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क्या है उपहार अग्निकांड?(Uphaar Cinema Fire Case)

बता दें कि 13 जून 1997 को दिल्ली के उपहार सिनेमा में आग लगने से 59 लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों घायल हुए थे. सालों तक चली सुनवाई के बाद सुशील अंसल और उनके भाई गोपाल अंसल को दोषी ठहराया गया. सुप्रीम कोर्ट ने दोनों को दोषी माना और 60 करोड़ रुपये दिल्ली सरकार के पास जमा करने का आदेश दिया था. इस रकम से द्वारका में ट्रॉमा सेंटर बनाने का निर्देश था लेकिन रकम का इस्तेमाल नहीं हो सका. यह राशि अब भी विवादों में है.

केस की वर्तमान स्थिति

यह मामला उपहार अग्निकांड की सजा के बाद सुशील अंसल के खिलाफ अलग से चल रहा है. कोर्ट का मानना है कि पासपोर्ट नियमों का उल्लंघन गंभीर है और इसमें जानबूझकर गुमराह करने की कोशिश की गई है. 25 अप्रैल से शुरू होने वाले ट्रायल में सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी. यह घटना पासपोर्ट आवेदन में सच्चाई छिपाने के गंभीर परिणामों को दर्शाती है.

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-भारत एक्सप्रेस



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