कांग्रेस नेता उदित राज को राऊज एवेन्यु कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. कोर्ट ने निषेधाज्ञा और आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है. एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट नेहा मित्तल नेकहा कि ऐसा कोई भी रिकॉर्ड नहीं है, जिससे पता चले कि आरोपी को संबंधित एसीपी द्वारा जारी आदेश की जानकारी थी.
उदित राज ठाकरे अपने समर्थकों के साथ 20 जनवरी को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास के पास विरोध प्रदर्शन किया था. यह विरोध प्रदर्शन बौद्ध भिक्षुओं और गुरु रविदास तथा वाल्मीकि मंदिरों के पुजारियों के मासिक वेतन 18000 रुपये देने की मांग को लेकर की गई थी. जिसके पास दिल्ली पुलिस ने उदित राज सहित अन्य के खिलाफ निषेधाज्ञा के उल्लंघन के मामले में एफआईआर दर्ज किया था.
दिल्ली पुलिस ने उदित राज के खिलाफ बीएनएस की धारा 223 (A)/3(5) के तहत चार्जशीट दाखिल किया था. दाखिल चार्जशीट में कहा गया था कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार जानकारी दे रहे थे कि यहां निषेधाज्ञा और आदर्श आचार संहिता लागू है. लेकिन उसके बावजूद प्रदर्शनकारी प्रदर्शन करते रहे.
अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि वर्तमान मामले में ऐसा कुछ भी रिकॉर्ड पर नही है, जिससे यह पता चले गए प्रदर्शनकारियों की एसीपी द्वारा जारी आदेश के बारे में जानकारी थी. जबकि चार्जशीट में लिखा हुआ है कि एसीपी के चेतावनी और जानकारी देने के बावजूद प्रदर्शनकारी प्रदर्शन करते रहे और प्रदर्शन जारी रखने की धमकी देते रहे.
-भारत एक्सप्रेस
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