West Bengal Election 2026 Row: पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को हुए मतदान के बाद राजनीति में नया मोड़ सामने आया है. मतगणना से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिस पर 2 मई को सुनवाई होगी. इस याचिका में चुनाव आयोग के उस फैसले का विरोध किया गया है, जिसमें काउंटिंग के लिए सिर्फ केंद्रीय कर्मचारियों को पर्यवेक्षक बनाने की बात कही गई है.
CJI ने सुनवाई के लिए बनाई स्पेशल बेंच
टीएमसी की याचिका पर सीजेआई सूर्यकांत ने एक विशेष बेंच बनाई है. इसमें जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची मामले की सुनवाई करेंगे. पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि मतगणना सोमवार सुबह से शुरू होनी है, इसलिए देरी होने पर याचिका का कोई मतलब नहीं रहेगा. टीएमसी का कहना है कि चुनाव आयोग का यह फैसला लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है.
कोलकाता हाई कोर्ट ने क्या कहा था?
कोलकाता हाई कोर्ट पहले ही केंद्र सरकार और पीएसयू कर्मचारियों को मतगणना में सुपरवाइजर और असिस्टेंट बनाने के फैसले को सही ठहरा चुका है. अदालत ने कहा था कि ऐसी नियुक्तियां करना चुनाव आयोग का अधिकार है और इसे गलत नहीं माना जा सकता. हाई कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगर बाद में साबित होता है कि इस फैसले से किसी पक्ष को गलत फायदा मिला और उसी वजह से टीएमसी उम्मीदवार बीजेपी से हार गया, तो नतीजों को कानून के तहत चुनौती दी जा सकती है.
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राज्य सरकार के पर्यवेक्षकों की मांग
इस पूरे विवाद के बीच टीएमसी ने यह मांग भी उठाई थी कि मतगणना प्रक्रिया में राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) बनाया जाए. पार्टी ने चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे संतुलित और निष्पक्ष बनाने की बात कही थी. हालांकि, हाई कोर्ट ने साफ कर दिया कि इस तरह की नियुक्तियों का अधिकार चुनाव आयोग के पास है और वह अपनी समझ के अनुसार यह फैसला ले सकता है. अब इसको चुनौती देते हुए TMC ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
-भारत एक्सप्रेस
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