दिल्ली के लाल किला कार ब्लास्ट मामले में गिरफ्तार यासिर अहमद डार को पटियाला हाउस कोर्ट ने 16 जनवरी तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. डार को एनआईए रिमांड की अवधि खत्म होने के बाद कोर्ट में पेश किया गया था. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने 10 दिन के लिए एनआईए रिमांड पर भेज दिया था. एनआईए के मुताबिक यासिर अहमद डार ने दिल्ली ब्लास्ट की प्लानिंग और इसे अंजाम देने में अन्य आरोपियों का साथ दिया था.
जांच में यह भी पता चला है कि यासिर अहमद डार दिल्ली बम धमाके के आत्मघाती उमर उन नबी और दूसरे आरोपी मुफ़्ती इरफान के संपर्क में था. एनआईए अन्य जांच एजेंसियों और विभिन्न राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर इस पूरे मामले की तफ्तीश में जुटी हुई है और पूरे टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है.
बता दें कि 10 नवंबर को लाल किले के बाहर हुए कार बम विस्फोट की योजना उमर उन नबी ने बनाई थी, जो हमले के समय विस्फोटक से भरी गाड़ी चला रहा था. इस विस्फोट में 15 लोगों की जान चली गई और दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए थे. उमर उन नबी की बाद में विस्फोट में मौत हो गई और फोरेंसिक जांच की पुष्टि हो चुकी है.
ब्लास्ट की प्लानिंग में डॉक्टरों का भी नाम
एनआईए ने इसे आतंकवादी हमला बताते हुए इसका संबंध जैश-ए-मोहम्मद के फरीदाबाद मॉड्यूल से बताया था. इस मामले में फरीदाबाद के अल-फलाह विश्वविद्यालय सहित देशभर से कई डॉक्टरों और संदिग्धों को गिरफ्तार किया है. अभी तक के जांच में पता चला है कि यासिर अहमद डार इस पूरे साजिश में सक्रिय था और आत्मघाती हत्या के लिए शपथ ले चुका था. डार जम्मू कश्मीर के शोपियां जिले का निवासी है.
यासिर अन्य आरोपियों के साथ घनिष्ठ संपर्क में था, जिनमें धमाके को अंजाम देने वाला मृतक आत्मघाती हमलावर डॉक्टर उमर नबी और मुफ़्ती इरफान शामिल था.
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-भारत एक्सप्रेस
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